शुगर मिल आंदोलन : प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजर
शुगर मिल आंदोलन : प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजर
-नोटिस देने, एफआईआर करने जैसे कदम के बावजूद अब पडे हैं उल्टे
मथुरा । छाता शुगर मिल को चालू कराने की मांग को लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से चल रहे आंदोलन से निपटने में अभी तक सरकारी मशीनरी सफल नहीं हुई है, आंदोलन से निपटने के लिए नोटिस देने, एफआईआर दर्ज करने, जबरन आंदोलनकारियों को हटाने जैसी कार्यवाही अभी तक प्रभावी साबित नहीं हुई हैं, पुलिस प्रशासन की ओर से उठाया गये हर एक कदम के बाद आंदोलन और तेज हुआ है, आंदोलन का प्रभाव बढा है और लोग ज्यादा संख्या में आंदोलन से जुड़े हैं ।.jpg)
सोमवार को जिला प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को जबरन हटाये जाने के बाद आंदोलन को और हवा मिली है जिसके बाद जिला प्रशासन ने कार्यवाही को यथास्थिति में छोड़ दिया है, सोमवार को रात के अंधेरे में धरना दे रहे लोगों हो हटाया गया था, धरना स्थल को खाली कराये जाने की सूचना आसपास के गांवों में फैली तो ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भर कर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण छाता शुगर मिल पर जुट गये, इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई, पुलिस की इस तरह की कार्यवाही को देखते हुए अब आंदोलनकारियों ने रणनीति में बदलाव किया है ।
धरना स्थल पर बडी संख्या में महिलाओं को आगे किया गया है, महिलाएं रात के समय भी धरना स्थल पर जमी हुई हैं, इसके बाद धरना स्थल पर कार्यवाही करने से पहले प्रशासन को अब रणनीति बदलनी होगी, रात को भी महिलाएं खुले आसमान के नीचे रात भर डटी रहीं, इसके बाद पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा, पुलिस की कार्रवाई से पहले तक जहां रात के समय धरना स्थल पर 50 से 70 लोग होते थे, वहीं महिलाओं की मौजूदगी ने इस संख्या को 250 के पार पहुंचा दिया, महिलाओं के पहुंचने से यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि हर साझा लड़ाई बन चुका है, दिन के समय जब हजारों की भीड़ जुटती है तो आसपास के गांवों से ग्रामीण भंडारे तैयार कराकर भोजन की व्यवस्था करते हैं।
वहीं रात में संकीर्तन के लिए जुटने वाली महिलाएं अपने अपने घरों से रोटियां सेककर लाती हैं, ताकि आंदोलन की आंच धीमी नही पड़े, तड़के दलिया और खिचड़ी का नाश्ता तैयार कर धरना स्थल पर मौजूद लोगों को दिया जाता है, किसानों के आंदोलन में आमतौर पर पुरुषों की बड़ी भागीदारी देखने को मिलती है लेकिन छाता शुगर मिल के आंदोलन में महिलाओं की मौजूदगी ने इसे अलग पहचान दी है, महिलाएं न केवल धरना स्थल पर पहुंच रही हैं, बल्कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं ।



















