ब्रह्मलीन हो गये ब्रज के विरक्त संत पद्मश्री रमेश बाबा
ब्रह्मलीन हो गये ब्रज के विरक्त संत पद्मश्री रमेश बाबा
-रमेश बाबा को धर्म, पर्यावरण व संस्कृति की रक्षा का माना जाता है अग्रदूत
मथुरा । ब्रज के विरक्त संत पद्मश्री रमेश बाबा मंगलवार को ब्रह्मलीन हो गए, 88 वर्ष की उम्र में बाबा ने बरसाना के गहवर वन स्थित मान मंदिर में अंतिम सांस ली, अधिक उम्र की वजह से रमेश बाबा को कमजोरी ज्यादा आ गई थी, पिछले कुछ समय से बीमार रहने लगे थे, ब्रजभूमि के परम पूज्य, विरक्त संत और गौ-पर्यावरण सेवक पद्मश्री रमेश बाबा महाराज का गोलोकवास हो गया है, उनके देवलोक गमन की खबर फैलते ही संपूर्ण ब्रज क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है ।.png)
राधा रानी की अनन्य भक्ति, गौ सेवा और ब्रज के प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले रमेश बाबा के जाने से ब्रजभूमि ने अपना एक सच्चा संत, सेवक और पर्यावरण प्रहरी खो दिया है, रमेश बाबा महाराज को ब्रज के धर्म, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा का अग्रदूत माना जाता था, उन्होंने ना केवल बरसाना और आसपास के क्षेत्रों में राधा रानी के नाम का प्रचार-प्रसार किया, बल्कि ब्रज की धरोहर को बचाने के लिए धरातल पर कड़ा संघर्ष भी किया, गौ सेवा के प्रति उनका समर्पण अतुलनीय था ।
उन्होंने बरसाना में माताजी गौशाला की स्थापना की, जो बेहद बड़ी और आधुनिक गौशालाओं में गिनी जाती है, यहाँ हज़ारों की संख्या में असहाय, बीमार और वृद्ध गायों की निरूस्वार्थ भाव से देखभाल की जाती है, रमेश बाबा महाराज का जाना केवल ब्रज क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैले उनके लाखों श्रद्धालुओं और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है, संतों, स्थानीय निवासियों और जन-प्रतिनिधियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे ब्रज के एक युग का अंत बताया है, उनका त्याग, तपस्या और पर्यावरण संरक्षण का संदेश आने वाली पीढय़िों का मार्गदर्शन करता रहेगा ।













