दिल्ली में प्रदर्शन से पहले किसान संगठनों के पदाधिकारी नजर बंद
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले किसान संगठनों के पदाधिकारी नजर बंद
-किसान संगठनों से जुडे पदाधिकारियों की हर गतिविधि पर है प्रशासन की नजर
मथुरा । भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित सीजेपी के धरना प्रदर्शन में किसानों के शामिल होने की घोषणा के बाद पुलिस ने मथुरा में किसान नेताओं की निगरानी बढा दी है, पुलिस किसान नेताओं को नजरबंद कर रही है, किसान नेताओं की लोकेशन ट्रेस कर रही है और उनकी गतिविधियों की भी लगातार टोह ली जा रही है, शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और महापंचायत से पहले भाकियू चढूनी के पदाधिकारियों को उनके घरों में नजरबंद कर लिया गया है जिससे कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है ।
प्रदेश प्रवक्त आगरा मंडल अध्यक्ष रामवीर सिंह तोमर ने कहा है कि किसान दिल्ली प्रोटेस्ट में किसान हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के शांति पूर्वक भाग लेने जायेंगे, उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट कर मोदी सरकार संविधान प्रदत्त अधिकारों को कुचल रही है, कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के निर्देश का पालन करते हुए शनिवार को दिल्ली आंदोलन में शामिल होने के निर्णय पर कायम हैं। .png)
उन्होंने बताया कि पुलिस कार्यवाही से कार्यकर्ताओं के हौसलों पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, किसान हितों के लिए आवाज उठाते रहेंगे संघर्ष करते रहेंगे, भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिला उपाध्यक्ष संजीव कुमार (भोला सूर्यवंशी) को पुलिस ने खेत से निगरानी में लिया, किसान नेता संजीव कुमार का कहना है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और अपनी बात रखना अपराध नहीं है, हम पुलिस की कार्यवाही का कड़ा विरोध करते हैं और मांग करते हैं कि इस तरह की कार्यवाही का कारण सर्वजनिक किया जाए, पुलिस घर में नजरबंद कर सकती है लेकिन किसानों की आवाज़ को नहीं दबा सकती, सरकार का ये तानाशाही से परिपूर्ण रवैया है ।













