
कृषि मंडी में भरा नाले का पानी, आढ़तियों ने किया प्रदर्शन
कृषि मंडी में भरा नाले का पानी, आढ़तियों ने किया प्रदर्शन
-मंडी परिसर में बरसात बंद होने के 72 घंटे बाद भी नहीं हो सकी पानी की निकासी
मथुरा । राजस्व संकलन में प्रदेश की प्रमुख मंडियों में शामिल मथुरा की कृषि उत्पादन मंडी समिति में मूलभूत सुविधाएं तो दूर नाले के गंदे पानी की निकासी का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। अपनी फसल बेचने आ रहे किसान इस गंदे पानी के बीच से गुजर रहे हैं और अधिकारियों को कोस रहे हैं, गुरुवार को पीड़ित व्यापारियों ने मंडी सचिव के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी समस्याएं मंडी सचिव को बताते हुए समाधान की मांग की है ।
तीन दिन पूर्व हुई तेज बरसात से हाइवे का नाला ओवर फ्लो हो गया, मंडी परिसर नेशनल हाइवे 19 के लेवल से नीचा है, ऐसे में गंदा पानी मंडी परिसर में घुस गया, नाले का गंदा पानी व्यापारियों की दुकानों, सड़क, किसानों की फसल नीलामी के लिए बने फड़ों पर एक-एक फुट तक भर गया। बरसात बंद होने बाद भी पानी निकासी न होने से नाराज व्यापारी मंडी सचिव कार्यालय पहुंचे, जहां आढतियों ने प्रदर्शन किया।
व्यापारियों ने मंडी सचिव को अवगत कराया कि मंडी में जलभराव एक स्थायी समस्या बनती जा रही है ऐसे में यहां आने वाले किसान अब दूसरी मंडियों की ओर रूख करने लगे है। इसका सीधा असर राजस्व संकलन पर पड़ेगा। बरसात में किसानों की फसल, व्यापारियों के खरीदे माल के भीगने का भय लगा रहता है। पूर्व में जलभराव के बाद तत्काल निकासी हो जाती थी लेकिन अब एक-एक सप्ताह तक गंदा पानी भरा रहता है, जलभराव से अनाज और सब्जी मंडी के हजारों व्यापारी, किसान प्रभावित हो रहे है। मंडी सचिव ने अतिशीघ्र जल निकासी के प्रबंध करने की बात कही है। व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडल में मोहन पांडेय, उमेश शर्मा, आशीष गर्ग, आलोक शर्मा, झम्मन वार्ष्णेय, विजय अग्रवाल मौजूद रहे।
मंडी में जलभराव की समस्या विकराल है, इसकी तकनीकी खामियां जिम्मेदार है, इस संबंध में आगरा व लखनऊ के अधिकारी पूर्व के निरीक्षणों में देख चुके हैं। मंडी का निर्माण करने वाली कार्यदाई संस्था ने सड़क और नाला निर्माण के दौरान हाइवे नाले के ऊंचे लेवल की ओर से आंखे मूंद ली, उसपर कोढ़ में खाज नाले की तलीझाड़ सफाई न होना, मंडी व्यापारी की निदेशक कार्यालय को भेजी शिकायत के बाद मंडी परिसर के अंदर हाइवे नाले के समानांतर नाला निर्माण कराए जाने का आश्वासन दिया, कहा गया कि मंडी परिसर के गंदे पानी को इस समानांतर नाले के माध्यम से मंडी चौराहे के बडे़ नाले में मिला दिया जाएगा, नाला निर्माण के एस्टीमेट के लिए भी डीडीए निर्माण को पत्र जारी हुआ लेकिन एक साल बाद भी अधिकारियों ने इस समस्या का स्थायी समाधान करने की जरूरत नहीं समझीं। इसका खामियाजा आज व्यापारी और किसान भुगत रहे हैं।