गीता को राष्ट्रीय धर्म ग्रंथ घोषित करने की माँग

गीता को राष्ट्रीय धर्म ग्रंथ घोषित करने की माँग 
-तीन दिवसीय गीता जयंती समारोह के प्रथम दिवस पर हुई संगोष्ठी
   मथुरा । श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति विद्वत समाज ब्रज मण्डल के तत्वावधान में आज मसानी स्थित सेवादास आश्रम पर श्रीमद् भगवद् गीता जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया, त्रिदिवसीय आयोजन के प्रथम दिवस पर वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य विद्वतजनों ने भगवद् गीता का पूजन अर्चन किया, तदुपरान्त मंगलद्वीप प्रज्जवलन कर वर्तमान परिपेक्ष्य में गीता की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। 
    समारोह की अध्यक्षता करते हुये समिति संस्थापक अमित भारद्वाज ने कहा कि गीता के उपदेश व शिक्षायें एक सिद्धान्त के रूप में है। गीता केवल धार्मिक ग्रन्थ नहीं बल्कि सार्वभोमिक ग्रन्थ है, इसकी शिक्षाएं किसी धर्म विशेष, जाति विशेष, क्षेत्र विशेष व सम्प्रदाय विशेष के लिये नहीं बल्कि जनकल्याण के लिये हैं, आचार्य लालजी भाई शास्त्री ने कहा की हमें अपनी भावी पीढ़ी को संस्कृत विषय की शिक्षा अवश्य देनी चाहिये जिससे वह सारगर्भित रूप से गीता का अध्ययन कर सकें।    
   आचार्य नन्दकिशोर शास्त्री ने कहा कि कर्म के सिद्धान्त को प्रतिपादित करने वाले इस ग्रन्थ की भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसकी प्रासंगिकता है, गोष्ठी में मोहन बाबा एवं समिति अध्यक्ष पं. शशांक पाठक ने गीता को राष्ट्रीय धर्मग्रन्थ घोषित करने का भारत सरकार से माँग का प्रस्ताव रखा जिसका सभी ने एक स्वर से समर्थन किया, पंकज पंण्डित ने बताया की समारोह के द्वितीय दिवस पर समिति द्वारा रविवार को गीता पाठ विद्वानों द्वारा किया जायेगा, तृतीय दिवस पर गीता का प्रति श्लोकी आहुति महायज्ञ का आयोजन होगा, गोष्ठी में विचार व्यक्त करने वालों में रामू बाबा, पं0 विनोद गौड़, संजय पिपरोनिया, गोपाल  शास्त्री, तरुण चोंबाल शास्त्री, रवि शास्त्री, पवन शर्मा, अमित  शर्मा आदि थे ।

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