मुस्लिम भाईयों को भी रहता है जन्माष्टमी पर्व का बेसब्री से इंतजार

मुस्लिम भाईयों को भी रहता है जन्माष्टमी पर्व का बेसब्री से इंतजार
-मथुरा में 150 से भी ज्यादा हैं मुकुट पोशाक के कारखाने, अधिकांश कारीगर हैं मुस्लिम 
   मथुरा । कारोबार का अपना गणित होता है, कान्हा की नगरी में मुसलमानों को भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बेसब्री से इंतजार रहता है जिसकी वजह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पोशाक, मुकुट, बांसुरी एवं ठाकुर जी के श्रृंगार का करोड़ों का कारोबार होना है, इन्हें तैयार करने के लिए 150 से अधिक कारखाने हैं जिनमें बहुतायत में मुस्लिम कारीगर ही काम करते हैं, यह त्योहार उनके लिए वर्षभर की रोजी रोटी का जरिया है । 


   जनपद मथुरा में पोशाक और मुकुट श्रृंगार का व्यवसाय फैला हुआ है, 150 से अधिक कारखानों में अधिकांश कारीगर मुस्लिम समाज के हैं, जो दिन रात भगवान श्रीकृष्ण के पोशाक और श्रृंगार का सामान तैयार करने में जुटे हुए हैं, वह इन लोगों की रोजी रोटी का भी एक साधन है, कान्हा के जन्मोत्सव का इंतजार इन्हें बेसब्री से रहता है, जन्माष्टमी से महीनों पहले से ही यह भगवान श्रीकृष्ण की पोशाकों को तैयार करने में लग जाते हैं, भगवान के मुकुट, गले का हार, पायजेब, बगल बंदी, चूड़ियां, कान के कुंडल जैसे आभूषणों को तैयार किया जाता है जिसके बाद इन्हें विदेशों में भी भेजा जाता है ।
    यहाँ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड कनाडा, नेपाल और अफ्रीका से भी ऑर्डर आते हैं, कान्हा की नगरी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आपसी सौहार्द की अनूठी मिशाल है, ठाकुर जी की पोषाक मुसलमान बनाते हैं वहीं गोकुल में नंदोत्सव के बाधाई गीत मुसलमान गाते हैं। इतना ही नहीं शहर भर में जगह जगह के काम में भी बडी संख्या में मुसलमान युवक उत्साह से अपना श्रम और योगदान देते हैं। कान्हा की पोशाकों को तैयार करने मे दिन रात मुस्लिम कारीगर लगे हुए हैं, पीढ़ी दर पीढ़ी इनका यह कारोबार चला आ रहा है। मथुरा में भगवान श्री कृष्ण के जन्म उत्सव को लेकर सभी तैयारियों में लगे हुए हैं ।
   वहीं प्रशासन भी पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव को अबकी बार दिव्य व भव्य बनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा हैं, जन्माष्टमी के अगले दिन गोकुल में सुबह जब कान्हा की जन्म की खुशियां मनाई जाती हैं तो बधाई गीत भी मुसलमान गाते हैं और शहनाई भी मुसलमान ही बजाते हैं। मुस्लिम कारीगर भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की सुंदर और आकर्षक पोशाक तैयार करने में लगे हैं। ठाकुर जी को जन्मोत्सव के दिन श्रृंगार में पहनाई जाने वाली पोशाकों के निर्माण में जुटे हुए हैं, इन पोशाक की भारत के विभिन्न शहरों में ही नहीं विदेशों में भी मांग है, मुस्लिम समाज के लोग अपने पूर्वजों के समय से ही भगवान श्रीकृष्ण की पोशाक बनाने का काम करते चले आ रहे हैं । 
  मुस्लिम कारीगर मोइनुद्दीन ने बताया कि 40 साल हो गये काम करते, विदेशों में भी जाती हैं हमारी पोशाक, इस पर फंर्ख महसूस करता हूं, हमारी किस्मत है कि ठाकुर जी ने हमें अपने कपड़ों को सिलने पर लगा रखा है। यह संदेश पूरा भारत में जाना चाहिए, भाईचारा सीखना है तो हमारे मथुरा वृंदावन से सीखें। पांच फुट के ठाकुर जी होंगे तो पोशाक सिलने में पूरा एक महीना लगता है, एक पोशाक में करीब पांच आदमी लगते हैं, हमें अच्छा लगता है, दिल को सुकून मिलता है, ठाकुर जी की पोशाक बनने में, भरत और भारत के बाहर के मंदिरों में हमारी पोशाक पहनाई जाती है।

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