यमुना खादर : वृंदावन से गोकुल तक विकसित हो गईं करीब 250 कॉलोनी

यमुना खादर : वृंदावन से गोकुल तक विकसित हो गईं करीब 250 कॉलोनी
-यमुना खादर में लगातार विकसित हो रहीं हैं कॉलोनियां, मूकदर्शक बने हैं जिम्मेदारान
   मथुरा । जनपद में अभी बाढ़ नहीं है फिर भी खतरा है, प्रशासन सतर्क है, बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है। कई जगह मुनादी भी कराई गई है, खतरे के निशान पर यमुना का जलस्तर पहुंचा नहीं उससे पहले ही हर ओर बाढ का हो हल्ला मचना शुरू हो गया है, यमुना में नौका विहार रोक दिया गया है, यमुना में स्टीमर और नौका संचालन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है, 39 बाढ चौकियों को चैकस किया गया है जबकि 25 स्थानों पर आश्रय स्थल बनाए गए हैं।
   नौहझील शेरगढ़ रोड पर पानी का बहाव तेज है एहतियात के तौर पर इस मार्ग पर यातायात को प्रतिबंधित कर दिया गया है। वृंदावन में श्रृंगार घाट, चीर घाट से लेकर केशी घाट तक परिक्रमा मार्ग पर लोगों का आवागमन रोक दिया है। इस मार्ग पर यमुना का पानी पहुंच गया है। केशी घाट से लगे अधिकांश क्षेत्र में यमुंना का पानी पहुंच गया है। यह अनुमान लगा कर चला जा रहा है कि इस बार यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से उपर निकल जाएगा। मथुरा में प्रयाग घाट पर 166 मीटर पर खतरे का निशान है ।
   पिछले एक से डेढ़ दशक में यमुना खादर में प्रशासन की मिलीभगत से कॉलोनाइजर दर्जनों नहीं सैकड़ों कॉलोनियां विकसित कर मुनाफा वसूल कर निकल गये हैं, ताजेवाला व ओखला बांध से पानी छोड़े जाने पर मथुरा में यमुना का जलस्तर बढ़ जाता है। यह बेहद तकनीकी काम है। पूरी गणना के साथ पानी छोडा जाता है। उपर से पानी छोडे जाने के साथ ही गोकुल बैराज पर उसी अनुपात में आगरा की ओर पानी का डिस्चार्ज किया जाता है। यह बेहद नियंत्रित प्रक्रिया है। बाढ़ नियंत्रण केन्द्र के मुताबिक यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों में भी बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। यमुना के तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी एसडीएम को अपने अपने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने को कहा है।
   यमुना के खादर जो कभी वीरान रहते थे देखते ही देखते आबादी क्षेत्र में परिवर्तित हो गये हैं। खतरे के निशान पर यमुना का पानी पहुंचने पर प्रशासन हरकत में आता था। यमुना का पानी खतरे के निशान पर नहीं पहुंचता इससे पहले ही आबादी क्षेत्र में पानी घुसने लगता है। लोग पलायन को मजबूर हो जाते हैं। एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन को भी अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। तमाम लोगों के लिए खतरे का निशान अब मायने नहीं रखता है। यमुना का जलस्तर भेले ही इस निशान को न छूए उन्हें इससे पहले ही विपरीत हालातों का सामना करना पडता है।
   वहीं दूसरी ओर यमुना नदी पूरे उफान पर है। शेरगढ़ क्षेत्र के गांव ओवा, धीमरी, गुलालपुर, बाबूगढ़ और आसपास के क्षेत्र के करीब 10 से अधिक गांवों के किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं, हालात बेकाबू होने की आशंका के चलते किसानों के पास कुदरत को अपना सहारा मानने और सरकार को कोसने के अलावा कुछ नहीं रहा है। हर साल यमुना नदी के तेज बहाव का कहर झेलते रहे हैं। हर साल किसान खेतों पर खड़ी सैकड़ों एकड़ फसल को यमुना में समाता देखते रहे हैं, वृंदावन में मंगलवार को एकादशी के मौके पर बाहर से आने वाले श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर वृंदावन की परिक्रमा कर रहे हैं जहां केसी घाट पर यमुना उफान पर है, इसके बावजूद भी श्रद्धालु जान जोखन में डालकर परिक्रमा लगा रहे हैं प्रशासन के द्वारा वहां कोई बेरिकेडिंग नहीं की गई परंतु चेतावनी बोर्ड के बावजूद भी श्रद्धालु जान जोखन में डाल रहे हैं और परिक्रमा लगा रहे हैं

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