युद्धग्रस्त क्षेत्र से जोधपुर झाल पहुंचीं ’कसाई पक्षी’ की पांच प्रजातियां
युद्धग्रस्त क्षेत्र से जोधपुर झाल पहुंचीं ’कसाई पक्षी’ की पांच प्रजातियां
-ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित किए जा रहे हैं जोधपुर झाल वेटलैंड
मथुरा । उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा वन विभाग के सहयोग से विकसित किए जा रहे फरह स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड के शीतकालीन पक्षी सर्वेक्षण के दौरान श्राइक जिसे कसाई पक्षी भी कहते हैं कि पाँच अलग-अलग प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया है, भारत में जो मुख्य रूप से मध्य और पूर्वी एशिया (रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान) से लम्बी दूरी तय करके यहां आते हैं, सर्वेक्षण के दौरान दो आवासीय प्रजातियां बे-बैक्ड श्राइक व लोंग-टेल्ड श्राइक के अलावा तीन प्रवासी प्रजातियां ग्रेट-ग्रे श्राइक, इसेबिलाइन श्राइक, तथा ब्राउन श्राइक की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह तीन प्रजातियां शीतकालीन प्रवासी पक्षी हैं जो मध्य एशिया और उत्तरी क्षेत्रों से भारत आते हैं।
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बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट डॉ0 के0 पी0 सिंह के अनुसार श्राइक पक्षियों को पक्षी वर्गीकरण में लैनिडी परिवार में रखा गया है, इस परिवार के अधिकांश पक्षी लेनूअस वंश के अंतर्गत आते हैं, श्राइक मध्यम आकार के पैसराइन पक्षी होते हैं जो अपनी विशिष्ट शिकार करने की शैली और मांसाहारी प्रवृत्ति के कारण अन्य गीत गायक पक्षियों से अलग माने जाते हैं, श्राइक पक्षियों को उनकी विशिष्ट शिकार शैली के कारण “बुचर बर्ड” या कसाई पक्षी भी कहा जाता है, ये पक्षी प्रायः ऊँचे पेड़ों, झाड़ियों, बिजली के तारों या बाड़ों पर बैठकर कीट, छिपकलियों, छोटे पक्षियों और कृन्तकों का शिकार करते हैं तथा कई बार अपने शिकार को काँटों या तारों पर फँसाकर रखते हैं ।
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ईकोलॉजिस्ट डॉ0 के0 पी0 सिंह के अनुसार जोधपुर झाल वेटलैंड में इन पाँच प्रजातियों का दर्ज होना इस क्षेत्र के वेटलैंड और आसपास के झाड़ीदार घास स्थल पारिस्थितिकी तंत्र की पारिस्थितिक महत्ता को रेखांकित करता है, विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र पैसराइन प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण विश्राम और भोजन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। इन पक्षियों को मथुरा का जोधपुर झाल काफी पसंद आ रहा है ।
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उनका कहना है कि श्राइक पक्षी का शिकार करने का अनोखा तरीका है, ये छोटे कीड़ों, चूहों, छिपकलियों और अन्य छोटे पक्षियों का शिकार करते हैं, अपने भोजन को संचित करने के लिए, ये मरे हुए शिकार को कांटेदार झाड़ियों, तार या नुकीली टहनियों पर फंसा देते हैं, इनका शरीर आमतौर पर भूरे, धूसर या सफेद रंग का होता है और आँखों के पास एक चौड़ी काली पट्टी (मुखौटा जैसा) होती है, यह बहुत ही सतर्क होते हैं और ऊंची टहनियों पर बैठकर अपने शिकार की तलाश करते हैं, इनकी आवाज तीखी और तेज होती है और ये कभी-कभी अन्य पक्षियों की नकल भी कर सकते हैं, इनका आकार लगभग 16 से 25 सेंटीमीटर के बीच होता है, यह अपने भोजन को कसाई की तरह टांगने के कारण प्रसिद्ध हैं ।






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