यूजीसी के इक्विटी नियमों पर पुनर्विचार की मांग, सौंपा ज्ञापन
यूजीसी के इक्विटी नियमों पर पुनर्विचार की मांग, सौंपा ज्ञापन
-अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर की व्यापक समीक्षा की अपील
मथुरा । अधिवक्ताओं के एक वर्ग ने गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है, इस ज्ञापन में उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता, निष्पक्षता, सामाजिक सौहार्द और सभी वर्गों के अधिकारों के संरक्षण की अपील की गई है, अधिवक्ताओं का यह वर्ग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वर्ष 2026 के समानता और भेदभाव रोकने संबंधी नियमों पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है।
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ज्ञापन में कहा गया है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था संविधान में निहित समानता, गरिमा और समान अवसर के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए, अधिवक्ताओं ने भेदभाव, जातिगत उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही यह भी कहा है कि नियम बनाते समय सभी पक्षों के अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, अधिवक्ताओं ने मांग की है कि वर्ष 2026 के समानता संबंधी नियमों की व्यापक और निष्पक्ष समीक्षा की जाए, उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेने का आग्रह किया ।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ऐसे प्रावधानों को लागू नही किया जाए जिनसे किसी निर्दाेष व्यक्ति या किसी वर्ग के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की संभावना उत्पन्न हो, ज्ञापन में उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग और आर्थिक स्थिति सहित किसी भी आधार पर होने वाले वास्तविक भेदभाव के खिलाफ निष्पक्ष शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करने की मांग की गई, अधिवक्ताओं ने शिकायत, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने तथा दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देने पर भी जोर दिया, इसके अतिरिक्त, अधिवक्ताओं ने सामाजिक न्याय के साथ योग्यता, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन की मांग की।
उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसे नियम बनाने से पहले व्यापक सार्वजनिक विमर्श कराया जाए। केंद्र सरकार की वर्तमान समीक्षा में सभी वर्गों के प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों की राय को उचित महत्व देने की भी अपील की गई, ज्ञापन में राष्ट्रपति से संबंधित मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, इस ज्ञापन की प्रतिलिपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और जिलाधिकारी को भी भेजी गई है ।







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