सात समंदर पार से आए मेहमान परिंदे, ग्रामीण बने पहरेदार

सात समंदर पार से आए मेहमान परिंदे, ग्रामीण बने पहरेदार
-मांट क्षेत्र में नारद कुण्ड बडी संख्या में प्रवास कर रहे हैं दूर दराज से आये पक्षी
    मथुरा । सर्दियों का मौसम शुरू होते ही नारद कुण्ड पर प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। इन परिंदों को पीछे की बहुत सालों से यहां की धरती और यहां की जलवायु  रास आती है। इन दिनों यहां के अलावा यमुना किनारे और गंगनहर के किनारे रंग बिरंगे प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुलजार हैं। वन विभाग की ओर से मेहमान परिंदों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किये जाते हैं जिससे शिकारी इनका शिकार न कर सकें। इस साल क्षेत्रीय वन विभाग ने इन मेहमान पक्षियों के स्वागत और सुरक्षा के लिए इस तरह के इंतजाम नहीं किए हैं।
     हालांकि कुंड के आसपास के गांवों के ग्रामीणों को पक्षियों का यहां आना पसंद है। वह खुद पक्षियों की पहरेदारी करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि पक्षियों का कोई शिकार न कर सके। ग्रामीण लोकेश सिंह कहते हैं। ये पक्षी हर साल यहां आते हैं, ये हमारे मेहमान हैं, उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और सभी ग्रामीण इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। तहसील मांट से 25 किमी दूर डडीसरा गावं के जंगल में नारद कुण्ड स्थित है। इन दिनों में प्रवासी पक्षियों को प्राकृतिक आवास और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण और पसंदीदा भोजन पर्याप्त मात्रा में मिलता है।
    इन पक्षियों में रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रे लेग गूस, बार हेडेड गूस, टफ्टेड डक, पिन टेल, कामन टील, नीलसर, अबलक, कुर्चिया बतख, टिमटिमा, टिकड़ी, स्पून टेल, रूडी सेल्डक (ब्राह्मनी) समेत तमाम प्रजातियों के विदेशी पक्षी यहां आकर सर्दियों के मौसम में प्रवास करते है चौधरी चोखलाल, डा. जागनसिंह, चन्द्रपाल प्रधान, हाकिम चौधरी आदि लोगो ने कहा कि नारद कुण्ड पर प्रवास बाले पक्षियों की देखवाल की जाती है तथा दूरदराज से आने बाले शिकारियों को इधर नहीं आने दिया जाता है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 66.5 डिग्री देशांतर से ऊपर के देशों में अधिक सर्दी पड़ती है। वहां बर्फ जम जाने के कारण परिंदों के लिए भोजन और प्रजनन का संकट पैदा हो जाता है। तब यह हजारों किलोमीटर का सफर तय कर भारतीय उपमहाद्वीप में आ जाते हैं। 
   पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिलने से इन परिंदों को तराई इलाका काफी पसंद आता है। प्रवासी पक्षी ऐसा स्थान चुनते हैं जहां उनके लिए पर्याप्त भोजन पानी, घास के मैदान और प्रजनन के लिए सुरक्षित घने पेड़ और झाड़ियां उपलब्ध हों। यह प्रवासी पक्षी नवंबर माह में साइबेरिया, रूस, चीन वियतनाम और यूरोपीय देशों से नवंबर के प्रारंभ में यहां आते हैं और प्रजनन के बाद जब सर्दी कम होने लगती है तो फरवरी माह के अंत तक अपने देश लौट जाते हैं। इलाके में प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं। पूरी सर्दी भर यह जगहें रंग बिरंगे पक्षियों की चहचहाट से गूंजते रहते हैं। वहीं चीन से आने बाली चिड़िया अपने अण्डे वहीं रख कर आती है और फरवरी माह मे बापिस पहुंचने पर अण्डों से बच्चे निकालती है ।

 

Advertisement
Advertisement
About Loktantra

भारत दुनियाभर का एक मात्र ऐसा लोकतांत्रिक देश है जो जनसंख्या एवं क्षेत्रफल के आधार पर एक अहम स्थान रखता है हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था भी बेमिसाल है यहां ग्राम ,मोहल्ला स्तर से लेकर जनपद, प्रदेश व देश स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित है। राज्य व केंद्रीय शासन द्वारा देश के प्रत्येक जनता की समस्याओं का ध्यान रखते हुए प्रशासनिक व्यवस्थाएं क्रियान्वित की जाती हैं |लोकतंत्र का आगाज उसी लोकतंत्रिक व्यवस्था की कड़ी के रूप में प्रत्येक नागरिक की आवाज का आगाज करते हुए समाचार प्रसारित कर शासन प्रशासन तक समस्याओं को प्रदर्शित कर व शासन-प्रशासन की योजनाओं को आम जन तक पहुंचाने में सजग है।

Total Users: 665634
Get In Touch

Office : faujadar market, opp. Patiram mandir, sonkh road, krishna nagar, mathura-281004

7417674275

[email protected]

Copyright ©2025 InzealInfotech. All rights reserved.