अनदेखी : जमीन खरीदने और बेचने वाले दोनों हो रहे हैं प्रताड़ित
अनदेखी : जमीन खरीदने और बेचने वाले दोनों हो रहे हैं प्रताड़ित
-खरीदारों और बेचने वालों से एक साल से डेढ़ साल का किया जा रहा एग्रीमेंट
मथुरा । मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण ने बुधवार को पानी गांव खादर में बडी कार्यवाही की, प्राधिकरण की दस जेसीबी ने अवैध रूप से विकसित की जा रहीं कॉलोनियों को ध्वस्त किया, यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी, अभी तक शहर के नियोजित विकास की बात होती थी, अब ग्रामीण क्षेत्र अनियोजित विकास की चपेट में हैं, गांवों व कस्बों को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों पर जमीन पर कॉलोनाइजरों ने नजरें गढा दी हैं, लगातार जमीनों की खरीद फरोख्त की जा रही है ।
जमीनों को कायदे कानून का पालन किये बिना रिहायशी इलाकों में तब्दील किया जा रहा है, इस दौरान किसानों के साथ ही खेतों में काटे जा रहे प्लाटों को कॉलोनी विकसित करने के नाम पर लोगों को बेचा जा रहा है, जो बाद में कई बार खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं, जमीन का खेल पैर पसारता जा रहा है, कृषि भूमि पर ही निकट भविष्य में संकट नहीं आ रहा, नौकरीपेशा वर्ग भी मकड़जाल में फंसता जा रहा है, गांव कभी शांति, सादगी और प्रकृति के अनुपम भंडार हुआ करते थे लेकिन अब शहरीकरण ने ग्राम्य जीवन का सुकून छीन लिया है ।
तथाकथित कॉलोनाइजर गांवों तक पहुंच गए हैं, किसानों से एग्रीमेंट कर देहात में कंपनियां बनाई जा रही हैं, हालांकि देहात में आवश्यकता के अनुरूप नहीं है लेकिन शहर की कालोनियों की चमक ने ग्रामीणों और नौकरी पेश वर्ग की भी मानसिकता को बदल दिया है, इसी का नतीजा है कि तथाकथित कॉलोनाइजर जहां भी खाली जगह देख रहे हैं, कॉलोनी का नक्शा लेकर उतर जाते हैं, ऐसा नहीं है कि इनका कारोबार हाईवे के इर्द गिर्द ही फैला है, देहात के दूरदराज क्षेत्र में भी कॉलोनी बनाई जा रही हैं।
दरअसल यह धंधा एक नए रूप में उभरकर सामने आ रहा है, तथाकथित कॉलोनाइजर पहले किसानों को अपने चंगुल में फंसाते हैं, फिर ग्राहक को लुभावने वायदे कर अपने मंसूबों को पूरा करते हैं, बीस से पच्चीस फीसद एडवांस देकर बाकी एक से दो साल की उधारी पर ये किसानों से जमीन खरीद लेते हैं, फिर उसी जमीन को ग्राहकों को चार गुना रेट में बेचते हैं, बेहतर और सुविधायुक्त कॉलोनी का ख्वाब भी दिखा रहे हैं लेकिन अंत में सबकुछ सिर्फ ढकोसला बना है, अब तक के उद्धरण इस बात को सिद्ध कर रहे हैं, ग्रामीणों ने बताया कि दस साल पहले एक कॉलोनी में प्लॉट लिया था, आज तक वहां कुछ नहीं है, अब लागत भी नहीं मिल रही है ।







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