श्रम की बूंदो से सिंचित कर दो रोटी का अधिकारी है

श्रम की बूंदो से सिंचित कर दो रोटी का अधिकारी है
सोच रहा सरल समझ से उन्नति में अब तो मेरी बारी है 
दो के चार और चार के आठ कर बनिया सुख का अधिकारी है 
सरल सोच से दो रोटी पर मिल पाती कहाँ तरकारी है।
रोटी श्रम की है उपज पर पडती श्रमिक पर भारी है।
करे क्या सरल सोच बेचारी 
रोटी पाना काम भारी हैं ।
श्रम की बूंदो से सिंचित कर दो रोटी का अधिकारी है ।।
द्वन्द विचार पर भाव लिखा
रश्मि माँ शारदे की आभारी है 
माँ ममता की मूरत कहते 
माँ बडी उपकारी है।
दुष्ट साथ न दे विधाता
दो रोटी सरल को पडती भारी हैं 
भूख बडी, दो रोटी पर सोचो
क्या चल पाती व्यवस्था परिवारी है ।
परिवार व्यवस्था चलाने की खातिर
दो रोटी को श्रम जारी है ।
सरल सोच से दो रोटी पर मिल पाती कहाँ तरकारी है ।


साभार : डॉ0 रश्मि वर्मा देवयानी, वृन्दावन

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