प्रभु श्रीगोदारंगमन्नार का 81 रजत कलशों से किया ज्येष्ठाभिषेक
प्रभु श्रीगोदारंगमन्नार का 81 रजत कलशों से किया ज्येष्ठाभिषेक
वृंदावन । नगर के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर में 81 अभिमंत्रित रजत कलशों को नौ-नौ की पंक्तियों में स्थापित कर देश की पवित्र नदियों का आवाहन किया गया, इसके बाद आगम पंचरात्र पद्धति के अनुसार गौदुग्ध, दही, घृत, मधु, शर्करा, इत्र सहित पंचगव्य से अभिषेक किया गया, पंचगव्य अभिषेक करके भक्त आनंदित हो उठे, दक्षिणात्य शैली के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर में नित्योत्सव श्रृंखला के अंतर्गत बुधवार को ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की नवमी एवं रेवती नक्षत्र के संयोग में ठाकुर श्री गोदारंगमन्नार भगवान का भव्य ज्येष्ठाभिषेक विधि विधान से हुआ ।
भीषण गर्मी से भगवान को शीतलता प्रदान करने की परंपरा के तहत वैदिक रीति-रिवाजों से महाभिषेक किया गया, उत्सव का शुभारंभ प्रातः 10 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ, सबसे पहले 81 अभिमंत्रित रजत कलशों को नौ-नौ की पंक्तियों में स्थापित कर देश की पवित्र नदियों का आवाहन किया गया, इसके बाद आगम पंचरात्र पद्धति के अनुसार गौदुग्ध, दही, घृत, मधु, शर्करा, इत्र सहित पंचगव्य से अभिषेक किया गया, महाभिषेक में केसर, कपूर, नवांग हल्दी, चंदन, विभिन्न जड़ी-बूटियों से मिश्रित जल, फलों के रस तथा आम के रस से ठाकुरजी का अभिषेक किया गया ।
वेदपाठी विद्वानों ने श्रीसूक्त, पुरुषसूक्त, वेंकटेश स्तोत्र, गुरु परंपरा एवं श्री वरद वल्लभ स्तोत्र का सस्वर पाठ किया जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा, मंडप में विराजमान ठाकुर श्री गोदारंगमन्नार भगवान के चल विग्रह का सूती वस्त्र धारण कराकर लगभग तीन घंटे तक लगातार जलाभिषेक किया गया, महाभिषेक के उपरांत भगवान को नवीन वस्त्र एवं आभूषणों से अलंकृत कर कुंभ आरती उतारी गई। अंत में श्रद्धालुओं को आम्राभिषेक (आम के रस) का प्रसाद वितरित किया गया, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्सव में भाग लेकर ठाकुरजी के दिव्य दर्शन किए ।






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