"ऐश वेनसडे" के साथ शुरू हुआ ईसाई समुदाय का 40 दिवसीय उपवास

"ऐश वेनसडे" के साथ शुरू हुआ ईसाई समुदाय का 40 दिवसीय उपवास 
-खजूर के पत्तों की राख से मस्तक पर बनाया क्रूस का चिन्ह, आत्मशुद्धि व प्रार्थना का संदेश
  मथुरा । बुधवार को ईसाई समुदाय के 40 दिवसीय उपवास काल (लेंट) का शुभारंभ ‘ऐश वेनसडे’ के साथ हुआ, इस अवसर पर शहर के विभिन्न चर्चों में विशेष आराधना सभाओं का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान और उनके वचनों को याद किया । 
   सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में विशेष प्रार्थना कृष्णापुरी चौराहे स्थित सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में आयोजित सभा में पादरी रेव0 श्रीपाल ने बाइबिल के संदेशों के माध्यम से उपवास के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि यह 40 दिन का समय आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर है, उन्होंने संदेश दिया कि उपवास केवल भोजन त्यागना नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा को शुद्ध करने का मार्ग है, सभा के दौरान पादरियों द्वारा खजूर के पत्तों की राख से श्रद्धालुओं के मस्तक पर पवित्र क्रूस का चिन्ह अंकित किया गया जो पश्चाताप और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है ।
    मान्यता के अनुसार, प्रभु यीशु मसीह ने जंगल में 40 दिनों तक उपवास रखा था, जहाँ शैतान द्वारा उन्हें कई प्रलोभन दिए गए लेकिन उन्होंने धर्मग्रंथ के वचनों से हर परीक्षा को पार किया, इसी स्मृति में ईसाई समाज के लोग इन 40 दिनों में आत्मिक शुद्धि और संयम का पालन करते हैं, इस दौरान प्रतिदिन विभिन्न घरों में संध्या प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएगी जिनमें सामूहिक रूप से बाइबल वाचन होगा, आस्था का यह महापर्व 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के साथ संपन्न होगा, जो प्रभु यीशु के बलिदान की याद दिलाता है, इसके बाद ईस्टर पर्व मनाया जाएगा, जो प्रभु के पुनरुत्थान का प्रतीक है, सभा के दौरान हिमांशु रोबिन, रवनीत कुमार मैसी सहित समुदाय के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।

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