रमणरेती आश्रम में मनाया जा रहा है कार्ष्णि गोपाल जयंती महोत्सव

रमणरेती आश्रम में मनाया जा रहा है कार्ष्णि गोपाल जयंती महोत्सव 
  मथुरा । कार्ष्णि उदासीन आश्रम में कार्ष्णि गोपाल जयंती का 95 वां वार्षिक महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, महोत्सव के दूसरे दिन कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज के बटुक शिष्यों ने मुंडन संस्कार कराकर भिक्षा मांगी गुरुशरणानंद महाराज ने बटुक शिष्यों को फल मेवा प्रसाद देकर आशीर्वाद दिया, प्रातः नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक शाम तीन बजे से शाम छह बजे तक संतों द्वारा भक्तों को गुरु शरणागत की विस्तार रुप से चर्चा की गई ।


   अयोध्या के संत गोविन्द देव गिरि महाराज ने कहा कि गुरु की संगति के बिना जीव भव सागर से मुक्त नहीं हो सकता इस लिए गुरु की शरणागत अवश्य होनी चाहिए, काशी के संत कार्ष्णि बृजेशानंद सरस्वती महाराज ने कहा वैदिक सनातन संस्कृति की ऐसी कोई धारा नहीं जो रमणरेती आश्रम से होकर नहीं बहती उन्होंने कहा गुरु की आज्ञा का पालन करना ही सबसे बड़ी साधना है, गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि ब्रह्मांड के सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण जिस रेती पर लोटपोट हुए उस रेती की रज जिस जीव के शरीर को स्पर्श कर देती है, उस जीव का जीवन धन्य हो जाता है। 
  भागवताचार्य रमेश भाई ओझा ने संगीत मय हरि संकीर्तन के साथ कहा जिस जीव को संतो के चरणों की रज अमृत के समान होती है, पूर्णायांनंद महाराज ने कहा कि अपने अहंकार, बुद्धि, और मैं के भाव को त्यागकर पूरी श्रद्धा से गुरु के ज्ञान और आज्ञा का पालन करना, यह केवल शारीरिक दंडवत नहीं, बल्कि मन का समर्पण जहां भक्त गुरु के वचनों को ही परम सत्य मानकर निष्ठापूर्वक साधन करता है, अपने गुरु को ही अपना परम रक्षक और मार्गदर्शक मानता है, वही शिष्य ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग खोजता है, कार्यक्रम का संचालन गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने किया, कार्ष्णि गोविंदानंद महाराज, कार्ष्णि हरदेवानंद महाराज, कार्ष्णि श्याम सुंदर महाराज, कार्ष्णि नागेंद्र महाराज, आचार्य अशोक जोशी, चंदर अरोड़ा, उमेश जटवानी, सुनील, सुधीर आदि भक्त मौजूद रहे ।

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