यमुना प्रदूषण के विरोध में निकाली शोभायात्रा, भक्तों के चेहरे पर झलका दर्द
यमुना प्रदूषण के विरोध में निकाली शोभायात्रा, भक्तों के चेहरे पर झलका दर्द
मथुरा । यमुना जी को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प के साथ विधि विधान से पूजन किया गया, इसके पश्चात सायं चार बजे भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें विभिन्न संस्थाओं के लोग उत्साहपूर्वक मां यमुना को स्वच्छ बनाने के नारे लगा रहे थे, शोभा यात्रा में सबसे आगे दो घुड़सवार और भगवान श्री गणेश की झांकी थी, साथ ही यमुना प्रदूषण को दर्शाती झांकी, श्रीनाथजी की मनमोहक झांकी और प्रकाश बैंड की मधुर धुनों के साथ पुष्पों से सुसज्जित मां यमुना जी का डोला मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा ।

इस आयोजन में श्री मान मंदिर सेवा संस्थान (बरसाना), श्री वामन भगवान महोत्सव समिति, अखिल भारत हिंदू महासभा सभा चक्रपाणि ग्रुप, भगवान परशुराम शोभायात्रा समिति, गिरिराज महाराज कॉलेज के छात्र प्राचीन योग माया मंदिर पुराना कंसखार श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा, भारतीय किसान यूनियन भानू, कोटवन की संत जगत गुरु मोनी बाबा माधव दास महाराज एवं उनका सारा साधु पारिकर,ब्रज तीर्थ देवालय न्यास और आचार्य बद्री जी सहित अनेक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है, गोकुल से पंकज बाबा भी प्रतिवर्ष की भाँति इस आंदोलन में सम्मिलित रहे ।
शोभा यात्रा में मुख्य रूप से श्री माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक महेश पाठक द्वारा मुख्य डोले का शुभारंभ करके शोभा यात्रा का प्रारंभ किया गया, इस अवसर पर संरक्षक गिरधारी लाल पाठक, उमाकांत चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष शिवकुमार चतुर्वेदी, संजय चतुर्वेदी एल्पाइन, कोषाध्यक्ष कमल चतुर्वेदी, महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट, मंत्री अमित चतुर्वेदी, नीरज चतुर्वेदी, अमित पाठक, अनिल चतुर्वेदी, पमपम, नवनीत चतुर्वेदी, गोपाल पाठक सोनू पंडित वृंदावन से मृदुल कांत शास्त्री बरसाना से सुनील चतुर्वेदी कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शामिल रहे ।
मुख्य संरक्षक महेश पाठक ने कहा कि यमुना जी का आंदोलन निरंतर रूप से चलता रहेगा और इसी प्रकार पूरे ब्रजमंडल को साथ लेकर यमुना जी को प्रदूषण मुक्त कराने हेतु कोई ना कोई ठोस योजना बनाई जाएगी और आप सभी के सहयोग से इस आंदोलन को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा, परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट ने कहा के इस दिन जागरण शोभा यात्रा के लिए जहां भ्रमण किया, वहां सभी जगह सकारात्मक रूप से समर्थन मिला और लोगों के दिल में यह भावना है कि जमुना जी निश्चित रूप से शुद्ध होनी चाहिए और पुण्यतीर्थ विश्राम घाट का स्वरूप बहुत ही भव्य बनना चाहिए क्योंकि लोग पुण्यतिथि विश्राम घाट पर ही पूजन अर्चन के लिए आते हैं ।







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