"सड़क परिवहन" की तरह नहीं है सुरक्षित "नदी परिवहन" का कोई सिस्टम
"सड़क परिवहन" की तरह नहीं है सुरक्षित "नदी परिवहन" का कोई सिस्टम
-प्रशासन के पास नदी में दौड़ रहे नाव, स्टीमर की फिटनेस जानने की नही फुर्सत
मथुरा । जनपद में सड़क परिवहन की तरह नदी परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है, गाड़ियों की तरह नावों या स्टीमर की फिटनेस, चालकों की योग्यता, चालचलन, स्पीड नियंत्रण, नशे में परिवहन करने पर सजा सुनिश्चित करने नदी परिवहन और संचालन को नियंत्रित और सुरक्षित बनाने के लिए जनपद में को व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है, नदी में नाव या स्टीमर दौडा रहा चालक नशे में तो नहीं है, इसकी जांच पड़ता की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
यहां तक कि चालक, ठेकेदार की चाल चलन, चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने, चालक नौका परिवहन के लिए योग्य है या नहीं ऐसी कोई योग्यता सुनिश्चित करने के लिए कोई सिस्टम ही नहीं है, सड़क पर दौड रहे वाहन की फिटनेस जांची परखी जाती है लेकिन स्टीमर या नावों के लिए जिला प्रशासन की ओर से ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है, इतना ही नहीं चालक की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कोई पहचान पत्र तक जारी नहीं किये गये हैं ।
नदी पर्यटन, धार्मिक पर्यटन पर सरकार का ध्यान है, पिछले साल 10.2 करोड़ पर्यटक यहां आये, यह आंकड़ा पर्यटन विभाग की ओर से जारी किया गया, इसके बावजूद इतनी बड़ी भीड़ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समुचित प्रयास और तक नहीं हुए हैं, नाव हादसा पहला और आखिरी हादसा नहीं है, फरवरी में विश्राम घाट पर ओवरलोड नौकाओं की टक्कर हो गई थी, स्थानीय गोताखोरों ने आठ लोगों की जान बचाई थी, इस दुर्घटना को संकेत मानते हुए किसी बड़ी घटना को टालने के लिए जिला प्रशासन कुछ प्रयास करता तो संभव है कि 10 अप्रैल को हुई घटना को टाला जा सकता था ।







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