ब्राह्मण बटुकों का विधि विधान से कराया गया यज्ञोपवीत
ब्राह्मण बटुकों का विधि विधान से कराया गया यज्ञोपवीत
-केशवधाम वेद विद्यालय में किया गया सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार
वृन्दावन (मथुरा) ।अक्षय तृतीया पर दशम यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन केशवधाम वेद विद्यालय में दो दिवसीय उपनयन संस्कार के रूप में किया गया जिसमें एक दर्जन विप्र बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ, यज्ञोपवीत संस्कार में बटुक ब्राह्मणों को वेदारम्भ संस्कार ब्रह्मदण्ड धारण कराया गया, साथ ही हवन करके गायत्री दीक्षा के साथ संध्या बंधन का दिव्य और अद्भुत ज्ञान प्रदान कराया । 
बीतराग संत गोविन्दानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत बालकों को अवश्य कराना चाहिए, ब्राह्मण का यज्ञोपवीत 8 वर्ष में क्षत्रिय का 11 वर्ष में एवं वैश्य का 12 वर्ष में होना चाहिए, उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत और शिखा दोनों ही व्यक्ति को श्रेष्ठ ऊर्जावान बनाते हैं, सूर्य की ऊर्जा विद्या प्रदान करती है, मुख्य वक्ता आचार्य डॉ. रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि वेद साक्षात भगवान हैं, वेद का अध्ययन बिना यज्ञोपवीत के नहीं करना चाहिए, जब यज्ञोपवीत संस्कार होने के बाद बटुक वेद अध्ययन करके यज्ञ कराते हैं, तब निश्चित ही यज्ञ सफल होता है, संत सतमित्रानंद महाराज ने कहा कि व्यक्ति का चरित्र ही उसके चित्र की पूजा कराता है, जब हम यज्ञोपवीत धारण करके अपने संस्कारों के साथ दैनिक कर्मों को करते हुए आध्यात्मिक कर्म करते हैं तो निश्चित ही हमारा जीवन सफल होता है ।
अध्यक्षता करते हुए लक्ष्मण सराफ ने कहा कि आज यह संस्कार सभी समाज के लिए आवश्यक है, केशव धाम निदेशक ललित कुमार ने कहा कि वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए सभी को यज्ञोपवीत धारण करना चाहिए, धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ओमप्रकाश बंसल ने बताया कि इस वर्ष 12 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार देकर वेदारंभ किया, वेद आदि का अध्ययन भी बच्चों को कराया जाता है, कार्यक्रम का संचालन आचार्य ब्रजेंद्र नागर ने किया, विश्वनाथ गुप्ता, गंगाधर अरोड़ा, वेद विद्यालय प्रधानाचार्य रवीन्द्र शर्मा, सुधाकर द्विवेदी, संदीप चतुर्वेदी आदि सहित अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।






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