शुगर मिल सिर्फ राजनीतिक नहीं, खेती की सेहत से भी जुडा है मुद्दा
शुगर मिल सिर्फ राजनीतिक नहीं, खेती की सेहत से भी जुडा है मुद्दा
-गैहूं, धान की खेती से आजिज किसान, ईख की ओर रूझान, 5 दिसम्बर को बडे प्रदर्शन की तैयारी
-26 नवम्बर से धरने पर बैठे हैं किसान संगठन, छाता सुगर मिल को चालू कराने की मांग
मथुरा । शुगर मिल की मांग छाता क्षेत्र में बडा चुनावी मुद्दा रही है, कई बार सवाल उठता है कि छाता क्षेत्र के किसान इतनी शिद्दत से इस मुद्दे को विधान सभा चुनवों से पहले क्यों उठाते हैं ? हालांकि लोक सभा चुनावों में भी यह मुद्दा उठता है लेकिन विधान सभा चुनावों जितना प्रभावी नहीं रहता है। एक बार फिर छाता शुगर मिल का मुद्दा गर्मा रहा है, प्रदेश सरकार में मंत्री को क्षेत्रीय विधायक चौधरी लक्ष्मीनरायण चुनावी समीकरणों को साधने में जुट गये हैं ।
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छाता क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वह धान और गैहूं की खेती से आजिज आ चुके हैं। लगातार रासायनिक उर्वरकों का उपयोग खेती में बढ रहा है। खेतों की सेहत भी खराब हो रही है। किसान चाहते हैं कि वह गन्ना की खेती फिर से अपनाएंगे जिससे उनकी माली हालत भी सुधरेगी और खेतों की सेहत भी। छाता सुगर मिल बंद होने के बाद क्षेत्र में धीरे धीरे गन्ने की खेती भी बंद हो गई, इसी के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती से किसानों ने मुंह मोड लिया, छाता शुगर मिल को दोबारा चालू किए जाने का मुद्दा तभी से विधान सभा और लोकसभा चुनावों में उठता रहा है ।
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हर बार सभी राजनीतिक दलों की ओर से छाता शुगर मिल चालू कराने का आश्वासन क्षेत्र के किसानों को दिया जाता रहा है पर वायदा पूरा नहीं हुआ। वायदा खिलाफी से आजिज किसानों विधान सभा चुनाव से पहले एक बार फिर किसानों ने आदोलन की रहा पकडी है। इस बार मामला थोडा अलग है। इस बार भाजपा को सामने वायदा पूरा नहीं करने की चुनौती से जुझना है। पिछले विधान सभा चुनावों में जोरशोर से पार्टी की ओर से यह वायदा किया गया था कि छाता शुगर मिल हर हाल में चालू करा दी जाएगी, सरकार बनने के बाद इस दिशा में कदम भी उठाये गये लेकिन बात बनी नहीं, और आई गयी हो गई। एक बार फिर विधानसभा चुनवों का शोर शुरू होने से पहले यह मुद्दा जोर पकड रहा है।
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क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि जब गन्ने की खेती होती थी तब हमारे पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था होती थी, धन का भी अभाव नहीं रहता था। छाता शुगर मिल बंद होने के बाद आय का श्रोत बंद हो गया। बसाना शासन तक शुगर मिल चल रही थी। इसके बाद घाटा दिखा कर मिल बंद कर दी गई, चुनाव से पहले हर कोई दावा करता है कि वह शुगर मिल चलवाएंगे, हम तब तक मुद्दे से हटेंगे नहीं जब तक कि शुगर मिल चालू नहीं होती हैं। गेहूं और धान में रसायन देकर जमीन खरबा हो रही है। ईख बोने पर किसान को आमदनी भी होगी ।







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