
साध्वी ऋतंभरा के जीवन को 121 दोहों में किया गया वर्णित
साध्वी ऋतंभरा के जीवन को 121 दोहों में किया गया वर्णित
मथुरा । वात्सल्य ग्राम स्थित विवेक हाउस में आयोजित संत सभा में साध्वी ऋतंभरा के सद्गुरु महामंडलेश्वर युग पुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज ने ’दोहों में दीदी मां’ पुस्तक का द्वितीय चरण लोकारण किया, डॉ उमाशंकर राही द्वारा रचित यह पुस्तक साध्वी ऋतंभरा के जीवन पर आधारित है उसमें 121 दोहे सचित्र प्रकाशित किए गए हैं, लोकार्पण करते हुए स्वामी परमानंद ने कहा कि पुस्तक सच्चाई पर आधारित है ऋतंभरा ने जो सेवा कार्य किए हैं वह अत्यंत सराहनीय हैं, उन्होंने अपना पूरा जीवन नारी उत्थान बाल कल्याण के लिए लगाया है।
महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानन्द ने सामाजिक परिवेश पर अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि आज हमें पारिवारिक प्रबोधन की आवश्यकता है अपने परिवार को संस्कृति और संस्कारों की गंगा जल से सीखना चाहिए। यदि हमारे बच्चे संस्कारित होंगे तभी भारत का अभ्युदय होगा भारत विश्व गुरु बनेगा और यह कार्य माता ही कर सकती हैं क्योंकि मातृशक्ति ही इस सृष्टि की मूल है।
साध्वी शिरोमणि ने कहा कि हमारा उद्देश्य समाज को सही दिशा देना है हमें अपनी पौराणिक परंपराओं धार्मिक आस्थाओं का अनुसरण करते हुए अपना जीवन जीना चाहिए, इस दौरान साध्वी चौतन्य सिंधु, महा मंडलेश्वर वेदानंद गिरि, साध्वी सुह्रदया गिरी, स्वामी सत्यशील, स्वामी सत्यश्रवा, साध्वी साध्या, साध्वी सत्यश्रुति, साध्वी सत्यमूर्ति, संविद की छात्राएं, यसोदा माताएं उपस्थित रहीं। संचालन साध्वी शिरोमणि ने किया।