RTI में मुआवज़े का अधिकार पारदर्शिता से न्याय की दिशा में कदम

RTI में मुआवज़े का अधिकार पारदर्शिता से न्याय की दिशा में कदम
लोगों को न्यायोचित राहत व मुआवज़े का अधिकार भी देता है यह कानून-महावीर पारिख
   जयपुर । सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) ने भारत में शासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, यह कानून केवल सूचना प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को न्यायोचित राहत और मुआवज़े का अधिकार भी प्रदान करता है—जब सरकारी अधिकारी द्वारा सूचना देने में लापरवाही, विलंब या अनुचित व्यवहार किया जाता है ।

#धारा 19(8)(b) : नागरिक को मुआवज़े का अधिकार

RTI अधिनियम की धारा 19(8)(b) के अनुसार, “यदि सूचना न देने या गलत सूचना देने से किसी आवेदक को क्षति हुई हो तो सूचना आयोग या अपीलीय प्राधिकारी यह आदेश दे सकता है कि आवेदक को उचित मुआवज़ा दिया जाए”, यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक को केवल सूचना ही नहीं, बल्कि उस सूचना में हुई देरी या क्षति की न्यायोचित भरपाई भी मिले।

#जवाबदेही तय करने की शक्ति : धारा 20

जहां धारा 19(8)(b) मुआवज़े की बात करती है, वहीं धारा 20(1) लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹25,000) तक का व्यक्तिगत जुर्माना लगाने का अधिकार देती है, यदि उसने जानबूझकर सूचना देने से इनकार किया या गलत सूचना दी हो, वहीं धारा 20(2) सूचना आयोग को यह अधिकार देती है कि वह संबंधित विभाग को निर्देश दे कि ऐसे अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए,
इससे सरकारी जवाबदेही केवल संस्थागत नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी सुनिश्चित होती है ।

#संवैधानिक दृष्टिकोण

  भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है और न्यायालयों ने बार-बार कहा है कि सूचना पाने का अधिकार इसी स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है, “जब कोई अधिकारी नागरिक को सूचना देने में विफल रहता है तो वह केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं करता बल्कि नागरिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है ।”
 महावीर पारीक, फाउंडर, लीगल अम्बिट

@न्यायिक उदाहरण :-

R.K. Jain v. Customs Department (CIC, 2009) — आयोग ने सूचना में अनुचित विलंब के कारण हुए नुकसान पर मुआवज़ा प्रदान किया।

CIC/OK/A/2006/00163 — गलत सूचना को नागरिक के मौलिक अधिकार का हनन माना गया और मुआवज़ा आदेशित हुआ।

इन मामलों से स्पष्ट है कि RTI केवल पारदर्शिता का नहीं, बल्कि न्याय और प्रतिपूर्ति का भी साधन है।

“सूचना का अधिकार—जनता का शासन पर अधिकार”
    “सूचना का अधिकार अधिनियम, नागरिकों को सरकार की जवाबदेही तय करने का कानूनी हथियार देता है, जब सूचना देने में लापरवाही होती है तो मुआवज़ा केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि संवैधानिक न्याय का प्रतीक होता है ।”

@निष्कर्ष
   सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 19(8)(b) और धारा 20 यह संदेश देती हैं कि नागरिक केवल सूचना के पात्र नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और प्रतिपूर्ति के भी अधिकारी हैं, यह कानून शासन में पारदर्शिता, ईमानदारी और नागरिक सशक्तिकरण की दिशा में भारत के लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींवों में से एक है ।


साभार : महावीर पारीक, सीईओ एवं फाउंडर–लीगल अम्बिट (Legal Ambit)

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