जनसंख्या नियंत्रण कानून : राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता
जनसंख्या नियंत्रण कानून : राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता
भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, स्वतंत्रता के समय लगभग 36 करोड़ जनसंख्या थी, जो आज 140 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है, तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या केवल आँकड़ा नहीं, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण, आवास, जल, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय संसाधनों पर गहरा दबाव डाल रही है, यदि समय रहते जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण नहीं किया गया तो विकास की सारी उपलब्धियाँ अर्थहीन हो जाएँगी, इसी संदर्भ में जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है ।
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@जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न प्रमुख समस्याएँ
#बेरोज़गारी और गरीबी : अधिक जनसंख्या के कारण रोजगार के अवसर सीमित हो जाते हैं । युवाओं की संख्या बढ़ती है लेकिन संसाधन उतनी गति से नहीं बढ़ते । इससे गरीबी, अपराध और सामाजिक असंतोष बढ़ता है ।
#शिक्षा और स्वास्थ्य पर दबाव : सरकारी स्कूल, अस्पताल और मेडिकल सुविधाएँ अपर्याप्त हो जाती हैं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ आम नागरिक तक नहीं पहुँच पातीं।
#प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन : जल, जंगल, ज़मीन और ऊर्जा संसाधनों का अनियंत्रित उपयोग पर्यावरण संकट को जन्म देता है,जल संकट और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं।
#शहरी अव्यवस्था : झुग्गियाँ, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, गंदगी और अपराध शहरी जीवन की पहचान बनते जा रहे हैं ।
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@जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता क्यों ?
स्वैच्छिक जागरूकता अभियानों के बावजूद जनसंख्या वृद्धि पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो पाया है। जब राष्ट्रहित सर्वोपरि हो, तब कानूनी ढाँचा आवश्यक हो जाता है ।
यह कानून : परिवार के आकार को संतुलित करेगा, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करेगा, भविष्य की पीढ़ी को बेहतर जीवन देगा, विकास योजनाओं को प्रभावी बनाएगा ।
@देश को होने वाले प्रमुख लाभ
#आर्थिक मजबूती : कम जनसंख्या दबाव से प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी, बचत बढ़ेगी और सरकारी योजनाएँ अधिक प्रभावी होंगी ।
#गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : कम छात्र संख्या से शिक्षा स्तर सुधरेगा, शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर होगा ।
#बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ : अस्पतालों पर भार घटेगा, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम होगी ।
#पर्यावरण संरक्षण : प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग होगा, प्रदूषण घटेगा।
#अपराध में कमी : गरीबी और बेरोज़गारी घटने से अपराध दर कम होगी ।
#महिला सशक्तिकरण : परिवार नियोजन से महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य का अवसर मिलेगा ।
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@संवेदनशीलता और संतुलन आवश्यक
#यह कानून : किसी समुदाय विशेष को लक्षित नही करे, मानवाधिकारों का सम्मान करे, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को संरक्षण दे, दंड से अधिक प्रोत्साहन आधारित हो, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ लागू हो ।
@निष्कर्ष
#जनसंख्या नियंत्रण कानून कोई कठोर प्रतिबंध नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की सुरक्षा कवच है, यदि हम आज साहसिक निर्णय नहीं लेंगे तो आने वाली पीढ़ियाँ संसाधनों के अभाव में संघर्ष करेंगी, संतुलित जनसंख्या ही समृद्ध भारत की आधारशिला है ।
“छोटा परिवार – सुखी परिवार नहीं, बल्कि समृद्ध राष्ट्र की पहचान है।”
साभार : शिखर अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ ।








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