एक तरफ स्कूल चलो अभियान तो दूसरी ओर बदतर हालात
एक तरफ स्कूल चलो अभियान तो दूसरी ओर बदतर हालात
-प्राथमिक विद्यालय पानी गांव द्वितीय 15 वर्षों से झेल रहा है जलभराव
मथुरा । सरकारी स्कूलों में बच्चों की मानक के अनुरूप न्यूनतम संख्या जुटाने के लिए अध्यापक अध्यापिकाएं पूरा जोर लगा रहे हैं, पूरा शिक्षा विभाग स्कूल चलो अभियान में जान फूंकने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की हालत ऐसी है कि कहीं स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड रहा है तो कहीं स्कूल में ही पानी भरा हुआ है, मांट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पानीगांव द्वितीय में लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है ।
विद्यालय परिसर और मुख्य प्रवेश मार्ग पर करीब दो फीट तक पानी भरा होने के कारण छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, हालात ऐसे हैं कि बच्चों का विद्यालय पहुंचना भी चुनौती बन गया है और पठन-पाठन व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, लगातार शिकायतों के बावजूद जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है ।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि परिसर में गंदा पानी भरा रहने से बच्चों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है, कई अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से हिचक रहे हैं, क्योंकि उन्हें संक्रमण और बीमारियों का डर सताता है, जलभराव के कारण कक्षाओं तक पहुंचने में भी परेशानी होती है जिससे पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है, विद्यालय की एक अध्यापिका ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है, पिछले करीब 15 वर्षों से विद्यालय हर बरसात में जलभराव की परेशानी झेल रहा है लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया, उन्होंने कहा कि इस कारण बच्चों की शिक्षा लगातार प्रभावित हो रही है और शिक्षकों को भी कठिन परिस्थितियों में कार्य करना पड़ता है ।
विद्यालय प्रशासन ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर जल्द स्थायी समाधान कराने की मांग की है, उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, यदि समय रहते जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है, ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए, ताकि छात्र बिना किसी परेशानी के विद्यालय आकर पढ़ाई कर सकें ।







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