सास की गला काटकर की थी हत्या, बहू को उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना
सास की गला काटकर की थी हत्या, बहू को उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना
मथुरा । थाना गोविंद नगर के चर्चित सावित्री देवी सोनी हत्याकांड में 12 साल बाद न्याय की घड़ी आई, जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार-आई, एचजेएस की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बहू को अपनी ही सास की निर्मम हत्या का दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई, शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह तरकर ने बताया, अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता डॉ0 अशोक कुमार वर्मा पुत्र एन0एल0 वर्मा निवासी डिफेंस कॉलोनी, भामतीपुरा रोड, धौलपुर राजस्थान ने सात दिसम्बर 2014 को थाना गोविंद नगर में तहरीर दी थी ।.jpg)
उन्होंने बताया कि उनकी सास श्रीमती सावित्री देवी सोनी पत्नी स्व. बाबू लाल वर्मा, निवासी गली पातीराम, मंडी रामदास, गोविंद नगर, मथुरा, आर्य समाज इंटर कॉलेज की सेवानिवृत्त शिक्षिका थीं, पति की मृत्यु के बाद वह अपनी बेटी सुमन वर्मा पत्नी डॉ0 अशोक कुमार वर्मा के साथ धौलपुर में रहती थीं और कभी-कभी अपने पैतृक घर मथुरा आती-जाती थीं। पांच दिसंबर 2014 को वह धौलपुर से अपने मथुरा वाले घर आईं, छह दिसंबर को उनकी पोती अध्या वर्मा पत्नी पंकज सोनी, निवासी कोटा को शादी समारोह में मथुरा आना था ।
7 दिसंबर 2014 को सुबह 7:30 बजे जब अध्या घर पहुंची तो उसने देखा कि उसकी दादी सावित्री देवी कुर्सी पर खून से लथपथ घायल अवस्था में बैठी हैं और उनकी मृत्यु हो चुकी है, मौके पर कमरे में तख्त पर बर्तन रखे थे और सामने स्टूल लगा था जिससे स्पष्ट था कि मृतका किसी जान-पहचान वाले व्यक्ति के साथ बैठकर बात कर रही थीं और उसी दौरान किसी बात पर विवाद होने पर धारदार हथियार से गले और शरीर पर कई वार कर उनकी हत्या कर दी गई, हत्यारे ने घर में रखे प्रॉपर्टी के दस्तावेज वाले बक्से को भी खंगाला था, पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 302 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें दूसरी बहू सीता वर्मा का नाम प्रकाश में आया।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि सीता वर्मा एक महिला है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह पिछले कई वर्षों से अपने पति से अलग रह रही है, उसके साथ नरम रवैया अपनाया जाए, वहीं डीजपीसी शिवराम सिंह तरकर ने तर्क दिया कि यह एक बुजुर्ग, अकेली महिला की गला काटकर की गई जघन्य हत्या है, यह मानव जीवन के विरुद्ध गंभीरतम अपराध है जिसमें कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए, दोनों पक्षों को सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश ने कहा कि मृतका एक बुजुर्ग महिला थीं, अभियोजन ने चिकित्सीय साक्ष्य और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से यह साबित किया है कि उन्हें गर्दन पर एक घातक चोट सहित कई धारदार हथियार की चोटें आईं, जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई, चोटों की संख्या और प्रकृति अपराध की गंभीरता को दर्शाती है, न्याय के हित में आजीवन कारावास की सजा ही उचित है ।



















