जेन जी’ आंदोलन का दिख रहा असर, युवाओं को राजनीति में अवसर
जेन जी’ आंदोलन का दिख रहा असर, युवाओं को राजनीति में अवसर
-दिग्गजों को आसान नहीं रही विरासत में अगली पीढी को राजनीतिक क्षेत्र सौंपना
मथुरा । देशभर की राजनीति जेन जी के इर्द गिर्द घूम रही है, जेन जी आंदोलन के उभार के साथ वह सब होता दिखा है जिस के बारे में एक दो साल पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती है, जेन जी स्थापित को नकारने और नए विचारों के साथ जुडने का दौर है, ऐसे में पीढी दर पीढी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी के हवाले करते चले आ रहे राजनीतिक दिग्गजों के लिए यह दौर मुश्किल खडी करता दिख रहा है ।
जनता नए विचारों नई सोच के साथ जुडती दिख रही है, ऐसे में राजनीति में नए चेहरों की आमद भी तेज हो रही है, जो दिग्गजों के लिए परेशानी का सबब बन रही है, राजनीतिक दलों में भी हलचल है, कांग्रेस, सपा, बसपा यहां तक कि भाजपा में भी टिकट के दावेदारों में नए चेहरे पहली कतार में दिख रहे हैं, सड़क की राजनीति से लेकर सदन की राजनीति तक का रास्ता तैयार हो रहा है, सिर्फ संघर्ष और विरासत ही नहीं मानसिक और वैचारिक मजबूती भी महत्वपूर्ण हो गई है, डिजिटल हो चले प्रचार अभियान और कुछ मिनटों में वायरल हो रहे बयान राजनीतिक ढांचे में फिट बैठ रहे युवाओं के लिए नए अवसर बना रहे हैं तो उन घरानों के लिए मुसीबत बढा रहे हैं, जो राजनीति को पीढी दर पीढी विरासत में लेकर घूम रहे हैं ।
मथुरा की शहर सीट पर कई दिग्गजों का राजनीतिक प्रभाव रहा है जिनमें कई बार के विधायक कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर, वर्तमान भाजपा विधायक श्रीकांत शर्मा, के अलावा महेश पाठक, अवागढ राजघराने के अलावा भी लगातार इस सीट पर कई नेताओं का प्रभाव रहा है, महेश पाठक अपने बेटे राजन पाठक के लिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं तो वहीं प्रदीप माथुर ऐसा करते नहीं दिख रहे, सभी राजनीतिक दल यहां प्रयोग करते रहे हैं और दावेदारों की सबसे लम्बी फेहरिस्त यहां रहती है ।
वहीं बलदेव विधानसभा क्षेत्र में सबसे पहले बात करते हैं, कई दशकों तक मथुरा में राजनीति के मजबूत स्तंभ रहे चौधरी सरदार सिंह की, वह तब गोकुल और अब बलदेव विधान सभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे और मंत्री भी बने, प्रदेश की जाट राजनीति का बडा चेहरा माने जाते थे, प्रदेश में जाट बिरादरी को ओबीसी कोटे में आरक्षण दिलाने में सरदार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही, सरदार सिंह अपने पुत्र सिद्धार्थ सिंह को राजनीतिक विरासत सौंपकर राजनीति में स्थापित नहीं कर सके, ऐसा करने के उनके प्रयास भी होते नहीं दिखे, वर्तमान विधायक पूरन प्रकाश अपने पुत्र पंकज प्रकाश को राजनीति में स्थापित करने का भरकस प्रयास कर रहे हैं, पंकज प्रकाश एक बार जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं लेकिन उनके लिए आगे की डगर इतनी आसान नहीं है ।
वहीं मांट विधान सभा क्षेत्र में कई दशकों तक एकाधिकार रखने वाले और जनपद की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले पं0 श्याम सुंदर शर्मा भी अपनी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी को सौंप नहीं सके हैं, उनके भाई कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ मुन्ना भईया और बेटे ललित शर्मा को आगे बढ़ाने के प्रयास सफल नहीं हो सके, भविष्य में वह खुद ही चुनावी मैदान में उतरेंगे यह तय है।
इधर दशकों से छाता विधान सभा क्षेत्र की राजनीति दो दिग्गजों के बीच खींचतान वाली रही है, वर्तमान प्रदेश सरकार में मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण और पूर्व मंत्री ठाकुर तेजपाल सिंह के इदगिर्द इस क्षेत्र की राजनीति चलती रही है, ठाकुर तेजपाल सिंह अपने पुत्र अतुल सिसोदिया को राजनीति में आगे बढ़ने का प्रयास कर चुके हैं जो सफल नहीं हो सका, वहीं मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण के परिवार से कई नाम आते रहे हैं लेकिन लिटमस टेस्ट होना बाकी है ।
गोवर्धन विधान सभा सीट लम्बे समय तक आरक्षित रही, इसके बाद विगत चुनाव सामान्य सीट पर हुए हैं, इस सीट पर किसी एक दिग्गज का बोलबाला कभी नहीं रहा है, हालांकि आवागढ राजपरिवार की राजनीतिक सक्रियता दशकों से बनी हुई है लेकिन कभी ताज उनके सिर नहीं बंधा, हां कुंवर मानवेन्द्र सिंह को जनता का पूरा प्यार मिला है और वह कई बार सांसद चुने गये, यहां तक दिग्गज कुंवर नटवर सिंह को भी उनके सामने हार झेलनी पडी, वहीं कुंवर नरेन्द्र सिंह की राजनीति बडे भाई मानवेंद्र सिंह के छाया में रही है, दोनों ही दिग्गजों के लिए अपनी नई पीढ़ी को आगे लाने की छटपटाहट तो है लेकिन उतना आसान नहीं दिख रहा ।



















