खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं भाजपा कार्यकर्ता
खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं भाजपा कार्यकर्ता
-जनप्रतिनिधियों ने पार्टी गाइडलाइन से हटकर अपनों को ही बना लिया प्रतिनिधि
-जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि होने की योग्यता पर पार्टी में ही उठते रहे हैं सवाल
मथुरा । उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जब पहली बार सरकार बनी थी तो पार्टी की तरफ से सबसे पहले लिए गए फैसलों में महत्वपूर्ण फैसला यह भी था कि कोई भी सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष अपने किसी रिश्तेदार या परिजन को अपना प्रतिनिधि नहीं बनाएगा, सभी जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के किसी कर्मठ कार्यकर्ता को अपना प्रतिनिधि बनाएंगे, इसके पीछे तर्क था कि कार्यकर्ताओं का हौंसला बढेगा और पार्टी कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाएगा ।.png)
भाजपा के केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व का यह स्पष्ट रुख रहा है कि पार्टी किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं, बल्कि अपने जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की है इसलिए विधायकों और जनप्रतिनिधियों के आधिकारिक या निजी प्रतिनिधियों के तौर पर कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि उनके हक की अनदेखी नही हो, पार्टी में समय-समय पर ऐसे कड़े निर्देश या आंतरिक व्यवस्थाएं लागू की जाती रही हैं जिनके तहत मंत्रियों और नए विधायकों को अपने सगे संबंधियों या परिवार के सदस्यों को आधिकारिक, निजी कर्मी या प्रतिनिधि नियुक्त करने से मना किया जाता है ।
इस प्रकार की नीति से उन कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं जिससे कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी तरह के असंतोष को पनपने से रोका जा सके, सत्ता का रंग चढा तो धीरे-धीरे पार्टी विद डिफरेंस यानी भाजपा का दूसरी पार्टियों से अलग होने वाला रंग फका पडने लगा, पहले कार्यकाल में भी सभी विधायक कों ने अपने ही परिजनों को अपना प्रतिनिधि बना दिया ।
वर्तमान विधायक और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्री रहे शहर सीट से विधायक श्रीकांत शर्मा के प्रतिनिधि सबसे ज्यादा चर्चा में रहे, बलदेव क्षेत्र से विधायक पूरन प्रकाश ने अपने बेटे पंकज प्रकाश को, प्रदेश सरकार में मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने अपने ही परिवार से नरदेव चौधरी को अपना प्रतिनिधि बनाया, तीनों ही विधायकों के प्रतिनिधि खासे चर्चा में रहे हैं, गोवर्धन क्षेत्र में पूर्व विधायक कारिंदा सिंह और वर्तमान विधायक ठाकुर मेघश्याम भी इस मोह से मुक्त नहीं रह सके, मांट विधायक राजेश चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी किशन सिंह भी अपने अजीज को प्रतिनिधि बना कर जनता के बीच पहचान दिलाते रहे हैं, जनप्रतिनिधि का प्रतिनिधि हालांकि कोई वैधानिक पद नहीं है और नहीं कोई बडा उत्तरदायित्व है जिसे प्रतिनिधि निभाता है लेकिन यह एक धमक तो है ही ।



















