डीएपी पर ज्यादा निर्भर हैं किसान, मिट्टी में बिगड़ रहा संतुलन
डीएपी पर ज्यादा निर्भर हैं किसान, मिट्टी में बिगड़ रहा संतुलन
-रबी मौसम की विभिन्न फसलों की बुवाई से पहले कृषि विभाग ने जारी की चेतावनी
मथुरा । जनपद मथुरा सहित समूचे प्रदेश में किसान रबी की फसल की बुआई के लिए डीएपी पर निर्भर हैं, साथ ही तय और आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरक का भी उपयोग कर रहे हैं, इससे भूमि में पोषक तत्वों का अनुपातिक संतुलन बिगड़ रहा है, इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही खेती महंगी पड रही है, रबी की फसल में किसान जरूरत के हिसाब से डीएपी के कई अन्य विकल्प भी अपना सकते हैं ।.png)
डीएपी यानी डाई अमोनियम फास्फेट और एनपीके एक रासायनिक और अमोनिया आधारित खाद है, डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन, 46 प्रतिशत फास्फोरस, 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 15.5 प्रतिशत अमोनियम नाइट्रेट होता है, दूसरी तरफ एनपीके में ज्यादातर किसान 12, 32, 16 का ही उपयोग करते है, रबी की फसल की बुआई शुरू होने से पहले कृषि विभाग ने किसानों के लिए चेतावनी जारी की है ।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि किसी भी फसल के अच्छे उत्पादन के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश का अनुपात 4, 2, 1 होना चाहिए, प्रदेश में वर्तमान में यह अनुपात 28, 9, 1 के रूप में आना यह दर्शाता है कि किसान खेतों के लिए बुवाई के समय केवल डीएपी का ही प्रयोग कर रहे हैं जिससे उनकी फसल को पोटाश की मात्रा नहीं मिल पा रही है जबकि यदि वे एनपीके का प्रयोग करें तो संतुलित रूप से तीनों महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की उपलब्धता हो जाएगी, रबी सीजन की विभिन्न फसलों जैसे चना, मटर, मसूर, गेहूं, सरसों तथा आलू की बुवाई के समय फास्फेटिक उर्वरकों की बेसल एप्लीकेशन के रूप में आवश्यकता पडती है।
वर्तमान में फास्फेटिक उर्वरकों के कई विकल्प किसानों के लिए उपलब्ध है, जैसे डीएपी, एनपीके, एसएसपी, इसमें से डीएपी में केवल दो ही तत्व मिलते है नत्रजन एवं फास्फोरस जबकि एनपीके के विभिन्न ग्रेड के कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर में संतुलित रूप में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटेशियम तीनों अत्यन्त महत्वपूर्ण प्राथमिक पोषक तत्वों की उपलब्धता हो जाती है, आलू जैसे महत्वपूर्ण कमर्शियल काप के लिए संतुलित उर्वरक विशेष रूप से पोटाश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, उत्पादन एवं उसके गुणवत्ता हेतु इसकी आवश्यकता होती है ।
इसी प्रकार फास्फोरस के दूसरे महत्वपूर्ण उर्वरक एसएसपी जिसमें 16 प्रतिशत फास्फोरस के साथ साथ 14 प्रतिशत सल्फर की भी मात्रा पाई जाती है। यह उर्वरक सरसों जैसे तिलहनी फसल के उत्पादन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण उर्वरक है। तेल के प्रतिशत में बढ़ोतरी के लिए सल्फर की आवश्यकता होती है। दलहनी फसलों के लिए भी एनपीके एवं एसएसपी जैसे उर्वरक डीएपी की तुलना में सस्ता एवं संतुलित है, जानकरी के अभाव में प्रायः किसान केवल डीएपी के प्रयोग के लिए परेशान होते है ।













