जिगड़ी भजन की तान में गूंजे भक्ति और देशभक्ति के स्वर
जिगड़ी भजन की तान में गूंजे भक्ति और देशभक्ति के स्वर
फरह । पंडित दीनदयाल धाम मेले में जिकड़ी भजन शुक्रवार रात से शुरू होकर सूर्याेदय तक चले, ढोलक की थाप और हारमोनियम के सुरों पर कलाकारों ने रामायण, महाभारत और सामाजिक कुरीतियों पर जिकड़ी भजन सुनाकर समां बांध दिया, रातभर पंडाल तालियों से गूंजता रहा और श्रोता सूर्याेदय तक जमे रहे ।.png)
शुभारंभ पर पूरन प्रकाश ने कहा कि दीनदयाल धाम क्षेत्र के गौरव और आस्था का केंद्र है, यहां की परंपराएं हमारी पहचान हैं, उन्होंने प्रतिभागियों को 10 हजार रुपये देने की घोषणा की, गायकों ने ढपली-मुरली और ढोलक, हारमोनियम की संगत में रामायण, महाभारत और सामाजिक कुरीतियों पर प्रस्तुति दी, कपिल थिरावली ने भारत की महिमा का गुणगान कर देशभक्ति का संदेश दिया, हरिशंकर नानऊ ने महाभारत प्रसंग से कलियुग में बदलते मूल्यों और रिश्तों में बढ़ते छल-कपट पर कटाक्ष किया ।
सुनीता छोंकर ने माता-पिता की सेवा और दोहरे व्यवहार पर जिकड़ी सुनाया, तेज सिंह अलवर ने कृष्ण-अर्जुन संवाद सुनाया- भगवान ने कहा, अर्जुन! ताकत पर घमंड मत कर, पहचान कर्मों से होती है, अर्जुन ने कहा, प्रभु! मैं भारत की धरती का वीर हूं, किसी से नहीं डरता, चंद्रवीर ने शहीदों पर फौजी की कहानी गाकर आंखें नम कर दीं, भूपेंद्र शर्मा ने महाभारत की चौपाइयां, मोतीलाल लोहकरेरा ने धन के मोह और जीवन मूल्यों तथा प्रहलाद सिंह पुरा मालोनी ने रिश्तों में प्रेम-विश्वास का महत्व बताया, लख्मी ने बेटियों के सम्मान पर गीत सुनाकर वाहवाही लूटी ।
कलाकारों ने पं. दीनदयाल के योगदान का गुणगान भी किया, बेसिक शिक्षक संघ फरह की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संयोजक मानसिंह राना, हेमराज सिंह, ललित रावत, लोकेन्द्र मिश्रा, तेजवीर सिंह सोलंकी, मनीष वर्मा, देवेंद्र सिंह, अनिल राना, संजीव आजाद, संजीव कुमार रहे, संचालन मान सिंह राना ने किया, पुरुष वर्ग में तेज सिंह ईसरोती, भूपेंद्र शर्मा, प्रहलाद सिंह धर्मेंद्र सिंह, मोतीराम, चंद्रवीर ने भी प्रथम पुरस्कार प्रदान किए गए, हरी शंकर ने द्वितीय और ओमप्रकाश ने तृतीय स्थान प्राप्त किया ।













