जन सहयोग समूह ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग को भेजा पत्र
जन सहयोग समूह ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग को भेजा पत्र
-गो संरक्षण को लेकर विरोधाभाषी नीतियों पर जताई कड़ी नाराजगी
मथुरा । गोरक्षक चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा की संदिग्ध मौत पर जंन सहयोग समूह ने गहरा दुःख व्यक्त किया है, साथ ही सरकार से मांग की है कि जहां एक तरफ गोभक्त गौरक्षक असुरक्षित हैं, वहीं दूसरी तरफ गोमांस के निर्यात को बढ़ावा देना लगातार गोहत्यारों को संरक्षण देना है इसलिये दो विरोधावासी कार्य बंद होने चाहिये, जनसहयोग समूह ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग को पत्र लिखकर गोमांस के निर्यात पर रोक और गोरक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस पत्र में जन सहयोग समूह के प्रमुख एवं सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार अग्रवाल ने कहा है कि यह एक अत्यंत ही गंभीर और पीड़ादायक विरोधाभास की ओर आकर्षित करना चाहता हूं, ब्रज की पावन धरा पर हाल ही में गौ भक्त संत चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा की निर्मम हत्या ने पूरे समाज को उद्वेलित कर दिया है, यह एक बड़ा विरोधाभास है कि जहां एक ओर सरकारें गौ शालाओं के लिए करोड़ों का सरकारी फंड जारी करती हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय संस्था यूएसडीए (यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर) के आंकड़े एक भयानक वास्तविकता प्रस्तुत कर रहे हैं ।
यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार भारत आज भी विश्व के शीर्ष तीन गौ मांस निर्यातक देशों में सम्मिलित है। वर्ष 2026 के लिए भारत से लगभग 17 लाख मीट्रिक टन गौ मांस निर्यात का अनुमान है, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसे स्पष्ट रूप से इंडियन बीफ के रूप में पहचाना और बेचा जा रहा है, यह सुसंगति के नियम का पूर्ण उल्लंघन है, सात नवंबर 1966 को संसद के बाहर गौ भक्तों पर जो दमन हुआ था, आज वह दमन निर्यात की उदासीन नीतियों के रूप में दिखाई देता है। एक तरफ कत्लखानों को आधुनिक बनाने के लिए सरकारी संरक्षण और सब्सिडी मिल रही है तो वह दूसरी ओर निस्वार्थ गौ-सेवा करने वाले संत और गौ वंश असुरक्षित हैं ।







.jpeg)









