संस्कृत भारती ने किया वार्षिक पंचांग का विमोचन
संस्कृत भारती ने किया वार्षिक पंचांग का विमोचन
-भारतीय संस्कृति में अति आवश्यक है सामाजिक व धार्मिक कार्यों के लिए पंचांग
मथुरा । संस्कृत भारती ब्रज प्रांत द्वारा वर्ष की भांति इस वर्ष भी भारतीय काल गणना के अनुसार सर्व समाज में तिथि, वार, त्यौहार, पर्व उत्सव आदि की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ विक्रम संवत् 2083 के वार्षिक पंचांग का विमोचन वृन्दावन परिक्रमा मार्ग स्थित सोहम आश्रम में महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज एवं स्वामी गौरवानन्द महाराज के करकमलों से वैदिक विधि विधान के साथ किया गया ।
संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मंत्री धर्मेन्द्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि गुलामी के काल खंड में हम अपने गौरवशाली अतीत व उसकी काल गणना को भूलकर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने लगे हैं, आज युवा पीढ़ी अपने भारतीय महिने तिथि और अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पंचांग वैदिक ज्योतिष शास्त्र पर आधारित समय गणना का एक पारम्परिक तरीका है, यह सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर वार, तिथि, नक्षत्र,योग और करण पांच अंग के माध्यम से शुभमुहूर्त, व्रत, त्यौहार और ग्रहों की स्थिति की सटीक जानकारी देता है। स्वामी गौरवानन्द महाराज ने कहा कि पंचांग भारतीय संस्कृति में धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए परिवार में अति आवश्यक है, स्वामी मुकुन्दानन्द, स्वामी रामानन्द, स्वामी शिवानंद, स्वामी ज्ञानानंद आदि संत एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे ।






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