उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एनजीटी बेंच की आवश्यकता
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एनजीटी बेंच की आवश्यकता
उत्तर प्रदेश आज गंभीर पर्यावरणीय संकटों से जूझ रहा है, नदियों का प्रदूषण, अवैध खनन, भूजल का गिरता स्तर, वृक्षों की कटाई और शहरी कचरे की समस्या लगातार बढ़ रही है, इसके बावजूद पर्यावरणीय मामलों में न्याय पाने के लिए लोगों को दिल्ली स्थित National Green Tribunal (एनजीटी) पर निर्भर रहना पड़ता है, यह आम नागरिकों के लिए महंगा और कठिन साबित होता है।
लखनऊ में एनजीटी की स्थायी बेंच स्थापित होना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहाँ पर्यावरणीय विवादों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, राजधानी होने के कारण लखनऊ प्रशासनिक और न्यायिक दृष्टि से सबसे उपयुक्त स्थान है, यदि लखनऊ में एनजीटी बेंच बनती है तो पर्यावरणीय मामलों का तेजी से निस्तारण होगा, आम लोगों की न्याय तक पहुँच आसान होगी और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी, इससे गोमती नदी, वायु प्रदूषण, अवैध निर्माण और कचरा प्रबंधन जैसे मामलों पर प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी ।
संविधान का अनुच्छेद 21 स्वच्छ वातावरण में जीवन जीने का अधिकार देता है इसलिए पर्यावरणीय न्याय को लोगों के करीब लाना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लखनऊ में एनजीटी बेंच केवल न्यायिक सुविधा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम है
साभार : शिखर अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ ।







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