वर्तमान समय में संग्रहालयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है-प्रो0 मणि

वर्तमान समय में संग्रहालयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है-प्रो0 मणि
-अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर वृंदावन शोघ संस्थान में हुआ कार्यक्रम
  मथुरा । अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर वृंदावन शोघ संस्थान में ‘भारतीय संग्रहालयी दृष्टि एवं पांडुलिपि परम्परा के विस्तार में ब्रज का योगदान’ विषयक व्याख्यान, पुस्तक लोकार्पण आदि कार्यक्रम सम्पन्न हुए, व्याख्यान के दौरान कार्यक्रम अध्यक्ष पदम्श्री प्रो0 बी0 आर0 मणि, पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली ने कहा कि वर्तमान समय में संग्रहालयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है, संग्रहालय एक पाठशाला है, जहाँ पर कलाकृतियों के प्रदर्शन के माध्यम से भारतीय इतिहास एवं संस्कृति के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती हैं, बताया कि राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में 14000 से अधिक पांडुलिपियाँ हैं, संग्रहालयों में पांडुलिपियों की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है, श्रीराधाकृष्ण विषयक पांडुलिपियों की संख्या सर्वाधिक है ।
   कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि मूर्त संग्रहालयों के रूप में ब्रज में सर्वप्रथम ब्रजनाभ जी ने केशवदेव, बलदेव एवं हरिदेव आदि देव प्रतिमाओं की स्थापना की थी, इसके साथ ही भोग, राग एवं श्रृंगार की परम्परा भी प्रचलित हुई, पांडुलिपियों में श्रीमद्भागवत की प्रतियां सर्वाधिक रूप से ब्रज में प्राप्त होती हैं, गौड़ीय सम्प्रदाय के आचार्यों ने पांडुलिपि लेखन के रूप में अनेक ग्रंथों की रचना की जिसमें जीव गोस्वामी, नरोत्तम दास एवं श्रीनिवासाचार्य का नाम महत्त्वपूर्ण है, कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ0 कात्यायनी अग्रवाल, निदेशक, विपश्यना संग्रहालय, मुम्बई ने बताया, संग्रहालय का इतिहास ईसा पूर्व से प्रारम्भ हो जाता है, संग्रहालय, भूत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ता है, संग्रहालय एक ज्ञान का केन्द्र है, कागज की खोज मानव इतिहास में महत्त्वपूर्ण खोजों में से एक है ।
 इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ ठा0 श्री बाँकेबिहारी जी के चित्रपट पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण से हुआ, अतिथियों को पटुका ओढ़ाकर स्वागत प्रशासनाधिकारी रजत शुक्ला एवं क्यूरेटर ममता कुमारी द्वारा किया गया, संस्थान के निदेशक डॉ0 राजीव द्विवेदी ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में संग्रहालयों की प्रासंगिकता बढ़ गई है, वे केवल कलाकृतियाँ प्रदर्शित करने के स्थान भर न होकर ज्ञान का महत्त्वपूर्ण केन्द्र हैं, पिछले 50 वर्षों में भारत में संग्रहालयों की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई है, संग्रहालय समाज में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका का निवर्हन कर रहे हैं, इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. (डॉ.) बीआर मणि को आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी द्वारा अभिनन्दन पत्र एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया, कार्यक्रम का संयोजन ब्रज संस्कृति संग्रहालय की क्यूरेटर ममता कुमारी द्वारा एवं संचालन डॉ0 राजेश शर्मा द्वारा किया गया ।
 

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