एक तरफ सील की कार्यवाही तो दूसरी ओर आवासीय भूमि में होटल की स्वीकृति
एक तरफ सील की कार्यवाही तो दूसरी ओर आवासीय भूमि में होटल की स्वीकृति
-अभी तक धड़ल्ले से चल रहे कोचिंग, होटल, रेस्टोरेंट, अब गेस्ट हाउस सील कार्यवाही
वृन्दावन । बीमारी के बीज रोपने वाले अब लहलाहर ही फसल को जला रहे हैं, बीज बोने में भी इनका लाभ रहा और उजाडने में भी वाहवाही मिल रही हैं, लखनऊ में हुए कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद मथुरा में ताबडतोड कार्यवाही जारी है, हजारों बच्चे कोचिंग सेंटरों के बंद होने के बाद परेशान हैं, उनकी फीस अटक गई है, कोचिंग सेंटर संचालक फोन तक नहीं उठा रहे हैं, कार्यवाही करने वालों से यह पूछने की हिमाकत कोई नही कर पा रहा कि वर्षों से होटल, रेटोरेंट और कोचिंग सेंटरों को अधूरे मानकों पर चलने की सहमति किससे मिल रही थी, सहमति देेने या आंख मूंदने वालों पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ? यह सहमति भुगतान पर थी या निशुल्क इसकी जांच कब होगी ?
लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड के बाद भी जिला प्रशासन एवं विकास प्राधिकरण सबक लेना नहीं चाहता है, प्रदेश में हो रहे अग्निकांडों पर शासन के कड़े रूख के बाद भी मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा मास्टर प्लान के विपरीत आवासीय क्षेत्र में लगातार व्यावसायिक मानचित्र पास किए जा रहे हैं, ऐसा ही वाक्या एक प्रकाश में आया है, जब आवासीय एवं आश्रम एवं धार्मिक मठ की भूमि पर होटल प्रेम आनन्दम की स्वीकृति सचिव मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण दे दी गई है ।
वहीं दूसरी ओर शासन द्वारा दिये गये निर्देष के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में बनी टीम आवासीय क्षेत्र में मानकों के विपरीत एवं बिना फायर सेफटी के चल रहे गेस्ट हाउस, होटलों, रेस्टोरेंट को सील किया जा रहा हैं, अब तक लगभग तीन दर्जन से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया है, अधिवक्ता ने बताया कि प्रशासन द्वारा पिंक एण्ड यूज पॉलिसी अपनाते हुए एक तरफ जहां प्रषासन गेस्ट हाउसों को सील करने की कार्यवाही कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आवासीय, धार्मिक-आश्रम मठ के लिए प्रयोज्य भू-भाग में होटल की स्वीकृति प्रदान कर रहा है ।
अधिवक्ता ध्रुवकृष्ण शुक्ला ने मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत करते हुए बताया कि लखनऊ अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा आहूत मीटिंग स्पष्ट आदेश दिए गए थे जो भवन जिस उद्देष्य के लिए स्वीकृत हुआ हैं, उसका प्रयोग उस कार्य के लिए किया जाये, अन्यथा की दृष्टि संबंधित प्रषासन एवं विकास प्राधिकरण कार्यवाही करें, उन्होंने तथ्य प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के आदेष के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, उन्होंने कहा कि शहर में वृन्दावन परिक्रमा मार्ग, प्रेम मंदिर के आसपास, ब्रजधाम कॉलोनी चैतन्य बिहार फ्लाईओवर के पास, यमुना फलड एरिया एवं बांकेबिहारी मंदिर के आसपास तंग गलियों एवं मुहल्लों में शोरूम, गोदाम, गेस्ट हाउस जैसी व्यावसायिक गतिविधियां अनवरत् रूप से चल रही है ।
उन्होंने बताया कि एमवीडीए द्वारा मानकों के विपरीत और मास्टर प्लान 2031 को ताक पर रखकर स्वीकृति दे दी गई है, उनके द्वारा पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए लगाई आपत्ति को सचिव एमवीडीए द्वारा खारिज कर आवासीय एवं धार्मिक मठ आश्रम की भूमि पर होटल बिल्डिंग अवैध निर्माण की स्वीकृति दे दी गई है, सर्वाेच्च न्यायालय ने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान में आरक्षित भूमि उपयोग बदलना जनहित के विरुद्ध है जिसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से की है, सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्राधिकरण शहर में 300 मीटर से बड़े भूखंडों पर जल संरक्षण हेतु ’’रेनवाटर हार्वेस्टिंग’’ की भी अनदेखी कर रहा है ।







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