
सड़क दुर्घटना : प्रशासन को लानी होगी 50 फीसदी की कमी
सड़क दुर्घटना : प्रशासन को लानी होगी 50 फीसदी की कमी
-लागू हुई नो हेलमेट, नो फ्यूल रणनीति, पेट्रोल पम्प पर सीसीटीवी से होगी निगरानी
मथुरा । जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने कार्यालय परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश लखनऊ के पत्र के द्वारा नो हेलमेट, नो फ्यूल रणनीति लागू करने की अपेक्षा करते हुए अवगत कराया गया है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु एवं घायलों की संख्या में वृद्धि के प्रति भारत सरकार द्वारा गम्भीर चिंता व्यक्ति की गयी है, हाल ही में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की हुई बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए समस्त जिलों में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करना अनिवार्य है, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली असामयिक मृत्यु व गम्भीर चोटों को रोकने के लिए एक ठोस, दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है ।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी लाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे प्राप्त करने के लिए नवाचार और व्यवहार परिवर्तन पर केन्द्रित उपायों को अपनाना अनिवार्य है। इस दिशा में शहरी क्षेत्रों में नो हेलमेट, नो फ्यूल रणनीति एक निर्णायक कदम हो सकती है। यह रणनीति न केवल हेलमेट पहनने को अनिवार्य बनाने में सहायक होगी, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति नागरिकों में जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना को भी प्रोत्साहित करेगी। मोटरवाहन अधिनियम 1988 की धारा 129 एवं उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली 1998 के नियम 201 के अनुसार सभी मोटर साइकिल चालकों एवं सवारियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित माकनों के अनुरूप प्रोटेक्टिव हेड गियर (हेल्मेट) पहनना अनिवार्य है।
इन प्राविधानों का उल्लघंन केन्द्रीय मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 177 के तहत दण्डनीय है, जिसमें जुर्माने का प्राविधान है। इस सम्बन्ध में जनपद मथुरा में स्थित सभी पेट्रोल पम्प संचालकों एवं स्वामियों को निर्देश दिये जाते हैं कि आगामी सात दिवसों में अपने प्रांगण में इस आशय के बड़े बड़े होर्डिंग लगाएंगे कि 26 जनवरी से किसी भी ऐसे दो पहिया वाहन चालक को पेट्रोल का विक्रय नहीं किया जायेगा। जिसके चालक तथा सहयात्री ने हेलमेट नहीं पहना हो। सभी पेट्रोल पम्प संचालक एवं स्वामी यह भी सुनिश्चत करेंगे कि उनके प्रतिष्ठान में सीसीटीवी कैमरा सदैव सक्रिय रहे, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में सीसीटीवी फटेज का आवलोकन कर आवश्यक निर्णय लिया जा सके।