"गोकुल में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण संग गोपियों ने खेली छड़ी होली"

"गोकुल में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण संग गोपियों ने खेली छड़ी होली"
-श्रद्धालुओं ने उठाया छड़ीमार होली का आनंद, मतमार छड़ी की चोट पर थिरके भक्त
   मथुरा । नंदगांव, बरसाना की लठामार होली, श्रीकृष्ण जन्मस्थान की सांस्कृतिक होली के साथ ही ठाकुर बांकेबिहारी, द्वारिकाधीश मंदिर, सप्त देवालयों की रंगभरी होली से होता हुआ ब्रज को मदमस्त करती होली का कारवां अब फाल्गुन मास उजार पक्ष की द्वादशी को गोकुल पहुंच गया, यहां अनूठी, अद्भुत और दिव्य छडी होली खेली गई, दुनियां भर में होली का यह स्वरूप गोकुल में ही देखने को मिलता है, विरले और अनूठे होली उत्सव को निहार श्रद्धालु बालकृष्ण की बालीलाओं और होली के आनंद से सराबोर हो उठे ।


    भगवान श्री कृष्ण ने जिस गांव में अपने बचपन की लीलाएं की थी, उस गोकुल गांव में द्वापर युग की दिव्य होली जीवंत हो उठती है, जब नंद भवन से निकलकर ग्वाल बालों के साथ बाल स्वरूप श्रीकृष्ण का डोला मुरलीधर घाट पर पहुंचा तो गोकुल में भक्ति भाव, श्रद्धा और मस्ती का संगम हर किसी को आनंदति कर रहा था, श्रद्धालुओं के चेहरे भी नीले पीले लाल हो गए, सभी एक दूसरे पर अबीर गुलाल उढेलने लगे, नंदभवन से डोला में विराजमान होकर सखाओं के साथ भगवान मुरलीधर घाट पहुंचे, यहां भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह को विराजमान किया गया। 


  श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप पर गोपियों ने छड़ियां बरसाना शुरू कर दीं, सभी छड़ीमार होली की मस्ती में सरोवर हो गए, इससे पहले डोला के साथ नंदकिला मंदिर से मुरली घाट तक शोभायात्रा निकाली गई, आगे कान्हा की पालकी थी और पीछे सुंदर वस्त्र पहने हुए हाथों में छड़ी लेकर चलती गोपियां और गोकुलवासी, भगवान की शोभायात्रा ने कुछ देर मुरली घाट पर विश्राम किया जिसके बाद होली की धूम शुरू हो गई और जमकर होली का श्रद्धालुओं ने लुफ्त उठाया, गोकुल की छड़ीमार होली भगवान श्री कृष्ण के बचपन में खेली थी, यहां गोपियों के हाथ में लठ्ठ नहीं छड़ी दिखाई देती हैं। उसी छड़ी से वह कृष्ण के सखाओं के ऊपर जमकर बारिश की गई, गोकुल में जिस समय भगवान श्री कृष्ण ने होली खेली थी तो उनकी आयु बहुत कम थी, श्रीकृष्ण को चोट न लग जाए इसलिए सखियां हाथों में छड़ी लेकर उनको मारती हैं, तभी से ही छड़ी मार होली की परंपरा चली आ रही है, घाट पर होली खेलते हुए दोपहर से शाम हो गई, हुरियारिनें थक नहीं रहीं थी, हुरियारे भी थम नहीं रहे थे, आसमान में भगवान भास्कर भी मानों ठिठक से गये हों, वह अस्तांचल को जाना ही नहीं चाहते हों ।

Advertisement
Advertisement
About Loktantra

भारत दुनियाभर का एक मात्र ऐसा लोकतांत्रिक देश है जो जनसंख्या एवं क्षेत्रफल के आधार पर एक अहम स्थान रखता है हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था भी बेमिसाल है यहां ग्राम ,मोहल्ला स्तर से लेकर जनपद, प्रदेश व देश स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित है। राज्य व केंद्रीय शासन द्वारा देश के प्रत्येक जनता की समस्याओं का ध्यान रखते हुए प्रशासनिक व्यवस्थाएं क्रियान्वित की जाती हैं |लोकतंत्र का आगाज उसी लोकतंत्रिक व्यवस्था की कड़ी के रूप में प्रत्येक नागरिक की आवाज का आगाज करते हुए समाचार प्रसारित कर शासन प्रशासन तक समस्याओं को प्रदर्शित कर व शासन-प्रशासन की योजनाओं को आम जन तक पहुंचाने में सजग है।

Total Users: 1469615
Get In Touch

Office : faujadar market, opp. Patiram mandir, sonkh road, krishna nagar, mathura-281004

7417674275

[email protected]

Copyright ©2026 InzealInfotech. All rights reserved.