
चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुका का स्पर्श करने को आतुर हुआ जनसमूह
चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुका का स्पर्श करने को आतुर हुआ जनसमूह
-पादुका स्पर्श कर भक्तों ने लिया चैतन्य महाप्रभु का आशीर्वाद
वृन्दावन । वृंदावन में साढ़े तेरह करोड़ नाम संकीर्तन महोत्सव धूमधाम के साथ आयोजित किया जा रहा है। आयोजन लीला रसिक महाराज राधा रश्मि एवं डॉ.कृष्ण किंकर महाराज के सानिध्य में हो रहा है। महोत्सव के तृतीय दिवस प्रातः काल महामंत्र का नाम जप किया गया। तत्पश्चात ठाकुर प्रिया प्रीतम का प्राकट्य महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। सायंकाल ‘नंदोत्सव’ धूमधाम के साथ मनाया गया। इसके साथ ही चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुका का आगमन हुआ। संपूर्ण पर्रिकर द्वारा चरण पादुका का स्वागत किया गया। प्रत्येक व्यक्ति महाप्रभु की चरण पादुका को स्पर्श करने के लिए उत्साहित दिखा।
इस शुभ घड़ी पर ग्रैमी पुरस्कार विजेता पंडित राकेश चौरसिया की बांसुरी वादन ने पूरे वातावरण को दिव्य चेतना से सराबोर कर दिया।पश्चिम बंगाल के नवद्वीप धाम में चौतन्य महाप्रभु की चरण पादुका फ्लाइट से दिल्ली लाई गई इसके बाद गाड़ी से वृंदावन लाई गई। सुदीन गोस्वामी, जयंत गोस्वामी, प्रदीप कुमार गोस्वामी के द्वारा इन पादुकोओ को नवदीप से वृंदावन लाया गया। इन चरण पादुकाओं का विशेष और पूजनीय इतिहास है, जो गौड़ीय वैष्णव परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है चौतन्य महाप्रभु ने जब 24 वर्ष की आयु में गृहस्थ जीवन का त्याग कर संन्यास ग्रहण किया तो उन्होंने अपनी पत्नी विष्णुप्रिया को अपनी लकड़ी की पादुकाएं (खड़ाऊं) दी थीं। विष्णुप्रिया ने महाप्रभु के संन्यास लेने के बाद अपने पूरे जीवनकाल में इन पादुकाओं की पूजा की उन्हें अपने पति का प्रतीक माना।ये मूल पादुकाएँ आज भी नवद्वीप के धमेश्वर महाप्रभु मंदिर में सुरक्षित और पूजित हैं।