मुडिया मेला का चरम पर है आकर्षण, संतों की निकलेगी शोभायात्रा

मुडिया मेला का चरम पर है आकर्षण, संतों की निकलेगी शोभायात्रा
-सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन पर शिष्यों द्वारा निभाई जा रही है परंपरा
    मथुरा । मुडिया मेला गुरु शिष्य परंपरा का दुनियाभर में अनूठा उदाहरण है, शायद ही गुरू शिष्य परंपरा को समर्पित इतना विशाल आयोजन कहीं देखने को मिलता हो, गुरू पूर्णिमा के दिन सबसे ज्यादा भीड रहती है, ब्रज में यह पर्व उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है, इसी दिन शिष्य गुरु से गुरु दीक्षा ग्रहण करते हैं, गुरू गद्दी पर बैठेंगे और शिष्यों को दक्षिणा देंगे, ब्रज में इस समय जगह जगह भागवत कथा चल रही है, भागवताचार्यों के अनुयायी बहुतायत में हैं। 
  गोवर्धन में यह मुड़िया मेला के नाम से प्रसिद्ध है, लम्बे समय से प्रशासन यह मानकर चल रहा है कि पांच दिवसीय मुड़िया मेला में एक करोड से अधिक श्रद्धालु गोवर्धन पहुंचते हैं, परिक्रमा करते हैं, हालांकि श्रद्धालुओं की गणना के लिए किसी सटीक वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग नहीं हुआ है, मुड़िया पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है, अब से 469 साल पहले सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन में प्रवेश करने पर उनके अनुयाई शिष्यों ने सिर मुढाकर परिक्रमा लगाई थी। तभी से मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
     मुड़िया मेला 4 जुलाई से शुरू हो गया है और 11 जुलाई तक चलेगा, मुड़िया शौभा यात्रा की तैयारियां पूरी हो गई हैं, 10 जुलाई को गुरूपूर्णिमा है, इसी दिन गोवर्धन में मुडिया संतों की शोभायात्रा निकलती है जो इस आयोजना का मुख्य आकर्षण है, चैतन्य महाप्रभु से प्रभावित होकर उन्होंने मंत्री पद त्याग दिया और वृंदावन आ गए। यहां चैतन्य महाप्रभु से दीक्षा प्राप्त कर वह गोवर्धन में मानसी गंगा के तट स्थित चक्लेश्वर मंदिर के निकट कुटी बनाकर रहने लगे। वे वृद्धावस्था में भी प्रतिदिन गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा किया करते थे। 
    सनातन गोस्वामी का अब से 468 वर्ष पूर्व आषाढ़ पूर्णिमा संवत 1558 को निधन हो जाने पर उनके शिष्यों ने परंपरानुसार सिर मुड़वा कर सनातन गोस्वामी की अर्थी के साथ गाते बजाते हुए कीर्तन कर परिक्रमा लगाई, सनातन गोस्वामी के निर्वाण की तिथि शिष्यों के लिए पुण्यतिथि बन गई, अनुयाई शिष्य सिर मुंडन कराकर शोभा यात्रा निकालते हैं, इस बार 469वीं मुड़िया शोभा यात्रा निकाली जाएगी, सनातन गोस्वामी पश्चिमी बंगाल के शासक हुसैन शाह के दरबार में मंत्री थे, चैतन्य महाप्रभु से प्रभावित होकर उन्होंने मंत्री पद त्याग दिया और वह वृंदावन आ गए, यहां चौतन्य महाप्रभु से दीक्षा प्राप्त कर, वह गोवर्धन में मानसी गंगा के तट स्थित चक्लेश्वर मंदिर के निकट कुटी बनाकर रहने लगे, वह वृद्धावस्था में भी प्रतिदिन गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा किया करते थे।
  राजकीय मुडिया पूर्णिमा मेला के लिए पुलिस व्यवस्था मजबूत की गई है, जिला प्रशासन ने करोडी मेला यानी एक करोड श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना मानते हुए तैयारियों को अंतिम रूप दिया है, दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी, 400-400 होमगार्डस के अलावा पीएसी दो कम्पनी और एक कंपनी आरआरएफ की भी तैनात की गई है, सादा वर्दी में भी महिला और पुरूष पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी कस्बा गोवर्धन जनपद मथुरा में 469वां राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला चार से 11 जुलाई तक परम्परागत रूप से मनाया जायेगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में मेला को सकुशल सम्पन्न कराये जाने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को नोडल अधिकारी नामित करते हुए मेला सेल को गठित कर लिया गया है।
    मेला क्षेत्र को 09 सुपर जोन, 21 जोन, 62 सेक्टर में विभाजित कर पुलिस बल का व्यवस्थापन किया गया है जिसमें 10 अपर पुलिस अधीक्षक, 21 पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक 106, पुरूष एसआई 523, महिला एसआई 57, पुरूष सिपाही 1925, महिला सिपाही 194, निरीक्षक एलआईयू एक, उप निरीक्षक एलआईयू छह, आरक्षी एलआईयू 36, रेडियो निरीक्षक दो, रेडियो उप निरीक्षक 14, प्रधान परिचालक यात्रिंक 18, प्रधान परिचालक सहायक परिचालक 50, कर्मशाला कर्मचारी सन्देश वाहक पांच, स्टैटिक मोबाइल 35, हैण्ड हेल्ड सैट 230, पीएसी दो कम्पनी, पीएसी फ्लड दो प्लाटून, आरआरएफ एक कम्पनी, एसडीआरएफ की एक टीम के अलावा 400 होमगार्डस की ड्यूटी लगाई गयी है, पुलिस बल को मेले के विभिन्न ड्यूटी स्थानों पर व्यवस्थापित किया गया है।
    गोवर्धन कस्बा में स्थित राधा कुंड, कुसुम सरोवर तथा मानसी गंगा में फ्लड पुलिस बल की टीमों के द्वारा निरंतर रिवर पेट्रोलिंग की जा रही है, यद्यपि मेला की अवधि में सुरक्षा की दृष्टिकोण से समस्त सरोवर की बैरिकेडिंग की गई है फिर भी बैरिकेटिंग को पार करके कोई गहरी सरोवर में स्नान हेतु न उतर जाए इसके लिए प्रशिक्षित डायवर्स की टोटल 9 टीम लगाई गई है जोकि सभी सरोवर में गहरे पानी में स्नान हेतु लगातार रोक रही है तथा सभी से अनुरोध किया जा रहा है कि स्नान केवल प्रशासन द्वारा लगाए गए पवित्र मानसी गंगा के फव्हारो के जल में ही स्नान करें।

 

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