
एमवीडीए सचिव ने दस्तावेज देने से किया इनकार, राज्यपाल को भेजी शिकायत
एमवीडीए सचिव ने दस्तावेज देने से किया इनकार, राज्यपाल को भेजी शिकायत
-साक्ष्य अधिनियम के तहत डेम्पियर नगर से सम्बंधित मांगे दस्तावेज, शपथ पत्र पर भेजी शिकायत
-बीएनएस की धारा 198, 199, 201, 255, 256, 335, 336 और 338 के तहत एफआईआर का है प्रावधान
-मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण ने एक फिर बटोरी सुर्खियां, विधि की अवज्ञा का है मामला
मथुरा । मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचारिता व घोटाले जैसे संगीन आरोपों को लेकर अक्सर सुर्खियां बटोरने की श्रृंखला में एक बार फिर से नए विवाद में घिरता नजर आ रहा है, अभी हाल ही चर्चा में आया विवाद विप्रा सचिव के खिलाफ साक्ष्य अधिनियम के तहत दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने को लेकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को भेजी गई शपथ पत्र पर शिकायत को लेकर है, आरटीआई एक्टिविस्ट, पत्रकार बालकृष्ण अग्रवाल द्वारा भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत डेम्पियर नगर से सम्बंधित कुछ दस्तावेज मांगे गए थे जिन्हें विप्रा सचिव अरविंद कुमार द्विवेदी द्वारा करीबन छह महीने के बाद बांछित दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध होने के बावजूद उनके आवेदन को तर्कहीन व आधारहीन बताते हुए मांगे गए सशुल्क दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया है, साथ ही मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण को भारतीय साक्ष्य अधिनियम के दायरे में आने से भी इनकार कर दिया गया है ।
पत्रकार बालकृष्ण अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को शपथ पत्र पर 7 जुलाई को भेजे शिकायती पत्र में बताया है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 75 के अंतर्गत 20 दिसम्बर 2024 को अपने आवेदन के साथ आंशिक भुगतान के रूप में 100 रुपये का पोस्टल ऑर्डर मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण को डाक के माध्यम से भेजकर शहर के आवासीय क्षेत्र डेम्पियर नगर से सम्बंधित सात बिन्दुओं में दस्तावेज सशुल्क उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, साथ ही उपरोक्त शुल्क के अलावा अन्य कोई भी शुल्क देय होने पर भुगतान करने को भी कहा गया लेकिन मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के सचिव अरविंद कुमार द्विवेदी ने पत्र संख्या 1213/म0वृ0वि0प्रा0/2025-26 दिनांक 21 जुलाई 2025 और पत्रांक 922/म0वृ0वि0प्रा0/2024-25 दिनांक 23/06/2025 के माध्यम से सम्बंधित दस्तावेज एमवीडीए कार्यालय में मौजूद व सहज उपलब्ध होने के बावजूद बालकृष्ण अग्रवाल के आवेदन को कथित तौर पर तर्कहीन व आधारहीन का हवाला देते हुए शहर के आवासीय क्षेत्र डेम्पियर नगर से सम्बंधित सात बिन्दुओं पर मांगे गए दस्तावेज देने से इनकार कर दिया गया है, उन्होंने विप्रा सचिव पर आरोप लगाया है कि विभागीय स्तर पर हुए किसी बड़े घोटाले व भ्रष्टाचार और निजी स्वार्थों के तहत किये जाने वाले कुकृत्यों को छिपाया जा रहा है और जनपद में अवैध निर्माणों को बढ़ावा देकर उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की छवि को धूमिल किये जाने का प्रयास किया जा रहा है ।
बालकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 75 भारतीय संसद द्वारा पारित एक संवैधानिक कानून है जो सम्पूर्ण भारत के प्रत्येक केंद्रीय व राज्य सरकार के समस्त विभागों पर लागू होता है, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 75 में स्पष्ट किया गया है कि "हर लोक अधिकारी, जिसकी अभिरक्षा में कोई ऐसी लोक दस्तावेज है, जिसके निरीक्षण करने का किसी भी व्यक्ति को अधिकार है, मांग किये जाने पर उस व्यक्ति को उसके प्रति उसके लिए विधिक फीस चुकाये जाने पर प्रति के नीचे इस लिखित प्रमाण पत्र के सहित देगा कि वह यथास्थिति ऐसे दस्तावेज की या उसके भाग की शुद्धि प्रति है तथा ऐसा प्रमाण पत्र ऐसे अधिकारी द्वारा दिनांकित किया जायेगा और उसके नाम और पदाधिमान से हस्ताक्षरित किया जायेगा तथा जब कभी ऐसा अधिकारी विधि द्वारा किसी मुद्रा का उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है, तब मुद्रायुक्त किया जायेगा तथा इस प्रकार प्रमाणित ऐसी प्रतियाँ प्रमाणित प्रतियाँ कहलाएंगी" ।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, किसी भी लोक प्राधिकारी द्वारा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 75 के तहत वांछित दस्तावेज विधिक व नियम संगत उपलब्ध नहीं कराये जाने की स्थिति में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाना है तथा एक लोक प्राधिकारी के रूप में अपने दायित्वों व कर्तव्यों को पूर्ण ईमानदारी व निष्ठा के साथ निर्वहन नहीं किया जाना है व विधि पूर्वक कार्य करने के निर्देशों की अवज्ञा व अवहेलना किया जाना है और उनके आवेदन पर वांछित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराकर प्रार्थी के आवेदन को बेबुनियादी और कथित तौर पर आधारहीन बताते हुए भ्रामक व मिथ्या सूचना (दस्तावेज) रचित कर कूटरचना किया जाना है व आवेदक को दिग्भ्रमित किया जाना है, साथ ही विभागीय स्तर पर हुए जनहित/लोकहित से जुड़े किसी बड़े घोटाले व भ्रष्टाचार के तथ्यों को छिपाये जाने का प्रयास किया जाना है ।
साथ ही बालकृष्ण अग्रवाल ने बताया, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 75 के अंतर्गत आवेदित प्रार्थना पत्र दिनांक 20 दिसम्बर 2024 पर वांछित साक्ष्य/दस्तावेजों में प्रश्नगत मानचित्र संख्या 728/M/2013-14 दिनांक 21/05/2014 से सम्बंधित आंशिक सूचना प्रपत्र, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्व में उपलब्ध कराये जा चुके हैं जिनसे स्पष्ट है कि प्रश्नगत मानचित्र संख्या 728/M/2013-14 दिनांक 21/05/2014 को मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा ही स्वीकृति दी गई है, मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण कार्यालय में वांछित दस्तावेज कार्यालय में सहज व सुलभता के साथ उपलब्ध हैं व वांछित दस्तावेजों को क्षति पहुंचाने या किसी भी तरह की छेड़छाड़ व जालसाजी जैसे कृत्य किये जाने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, वांछित दस्तावेज जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराये जा रहे हैं जो भारतीय न्याय संहिता की धारा 227 एवं धारा 228 के अनुसार जानबूझकर मिथ्या व भ्रामक व कूटरचित सूचना (दस्तावेज) दिया जाना है तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 198, 199, 201, 255, 256, 335, 336 और धारा 338 के तहत संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है व दण्डनीय अपराध भी है ।
आरटीआई एक्टिविस्ट व पत्रकार बालकृष्ण अग्रवाल ने राज्यपाल उत्तर प्रदेश शासन को शपथ पत्र पर भेजे शिकायती पत्र में मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण सचिव द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाना व भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 75 में उल्लिखित विधि की अवज्ञा व अवहेलना किया जाना एवं एक लोक प्राधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों व जिम्मेदारी का पूर्ण ईमानदारी व निष्ठा के साथ निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए विभागीय कार्यवाही करने के साथ ही भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में विधिक कार्यवाही करने की मांग करने के साथ ही उनके 20 दिसम्बर 2024 पर डेम्पियर नगर से सम्बंधित 7 बिन्दुओं पर वांछित समस्त दस्तावेज मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण सचिव से नियमानुसार जल्द से जल्द उपलब्ध कराये जाने की मांग की है ।