रालोद जिसके भी साथ गई उसे नुकसान हुआ-चौधरी लक्ष्मी नारायण

रालोद जिसके भी साथ गई उसे नुकसान हुआ-चौधरी लक्ष्मी नारायण
-विरोधी और समर्थक हुए सक्रिय, सोशल मीडिया पर छाया हुआ है मुद्दा
  मथुरा । यूपी में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं लेकिन बातें शुरू हो गई हैं, यह बातें जनता के बीच नहीं खुद नेताओं और कद्दावर नेताओं के बीच हैं और बात चीत से आगे आरोप प्रत्यारोप तक पहुंच गई हैं, एनडीए का हिस्सा रालोद मथुरा में मजबूत रहा है जबकि मथुरा में भाजपा की तूती बोल रही है, ऐसे में दोनों दल अभी तक साथ रहने के बावजूद एक साथ नजर नहीं आ रहे हैं, अब नेताओं में तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई है।
      छाता विधानसभा क्षेत्र से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि भाजपा ने राष्ट्रीय लोकदल को अपने साथ मिलकर बंटाधार कर लिया, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जितनी भी राष्ट्रीय लोकदल की वजह से मुजफ्फरनगर और कैराना समेत अन्य कई सीटें बीजेपी हार गई है, चीनी मिल एवं गन्ना विकास मंत्री और छाता विधायक चौधरी लक्ष्मी नारायण ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को लेकर बड़ा बयान दिया। 
  उन्होंने दावा किया कि जब जब आरएलडी, एनडीएम में शामिल हुई है, भाजपा को नुकसान हुआ है, इतना ही नहीं वह बाकयदा आरएलडी का पूरा इतिहास बताते हैं, कैबिनेट मंत्री ने आरएलडी के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 2004 में अटल सरकार में आरएलडी को मंत्री पद मिला और सरकार चली गई, इससे पहले वह नरसिम्हा राव, वीपी सिंह और अखिलेश यादव के साथ गए, हर बार साथ देने वाले हार गए। उन्होंने ताजा लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा 400 सीटों के लक्ष्य से 240 पर आ गई, और इसमें आरएलडी की साझेदारी भी एक कारण रही। 
   वार्ता के दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मस्थान कॉरिडोर मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। कोर्ट ने विकास कार्यों की निगरानी के लिए पूर्व जजों की समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि जन्माष्टमी के अवसर पर किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं होगी।  2017 में उन्होंने बसपा छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी और जीत दर्ज की थी। इससे पहले बसपा सरकार में वह कृषि मंत्री और कारागार मंत्री भी रह चुके हैं। चौधरी लक्ष्मी नारायण ने 2002 का किस्सा याद करते हुए कहा कि तब अटल सरकार थी और राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे । 
  उन्होंने पूछा था कि आरएलडी को सरकार में शामिल करने से चुनाव पर क्या असर पड़ेगा? मैंने साफ कहा था कि लोकदल का इतिहास है, जिसके साथ गए, उसका बंटाधार हुआ। कुछ दिन बाद ही मेरी बात सच हो गई। आरएलडी, एनडीए में शामिल हुई और राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मात्र 86 विधायक जीते। बाद में अटल जी की सरकार भी चली गई। उन्होंने कहा कि आरएलडी का वोटर कभी भाजपा को वोट नहीं देता। मथुरा में पिछले चुनाव में भाजपा पांच सीटों पर भारी बहुमत से जीती थी, ऐसे में वहां किसी और को सीट देना संभव नहीं।

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