मथुरा : इस बार नही आई बाढ़ फिर भी मच गई तबाही

मथुरा : इस बार नही आई बाढ़ फिर भी मच गई तबाही
-बरसात से बढ़ी छतों पर रात गुजार रहे लोगों की मुसीबत, मच गया हाहाकार
   मथुरा । यमुना का पानी घरों में घुस गया तो लोगों ने छतों पर डेरा डाल लिया, शनिवार को रुक रुक कर हुई बरसात ने लोगों की मुसीबत और बढ़ा दी, अब उनके पास यहां राहत शिविरों में जाने के भी कोई विकल्प नहीं बचा है, करीब पांच दिन तक लगातार यमुना जल में वृद्धि के बाद शुक्रवार की सुबह से यमुना के जलस्तर में गिरावट देखने को मिली, शनिवार को पानी और नीचे चला गया, जलभराव वाले स्थानों पर पानी लगातार कम हो रहा है, परिक्रमा मार्ग में पहुंचा यमुना का जल यमुना की ओर लौटने लगा है ।
   जिला प्रशासन की ओर से लगातार लोगों की मदद की जा रही है, जनप्रतिनिधि अधिकारियों के साथ मिलकर राहत सामग्री का वितरण कर रहे हैं, राहत शिविरों में लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है, यमुना के किनारे जनपद में 116 गांव ऐसे है, यमुना का जलस्तर बढने पर लोग सतर्क हो जाते हैं जिनपर प्रशासन की भी नजर रहती है, इस बार शेरगढ़ क्षेत्र के गांव बाबूगढ़ और बलदेव क्षेत्र के गांव अकोस ही प्रभावित हुए, दोनों गांवों के रास्ते बंद हो गये, प्रशासन ने इन गावों में सुविधा दीं। इन गावों के रास्ते जलमग्न हुए लेकिन गावों में मकानों को नुकसान नहीं पहुंचा ।
  जिलाधिकारी सीपी सिंह ने बाढ के दौरान ही अकोस गांव का दौरा किया और फ्लाईओवर बनाये जाने का ग्रामीणों की मांग को स्वीकार करते हुए समस्या के स्थाई समाधन की बात कही, फ्लाईओवर बनने के बाद गांव का रास्ता बाढ आने पर बंद नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर मथुरा और वृंदावन की दर्जनभर कॉलोनियों की हालत बेहद खराब हो गई, यहां यमुना के पानी में घर घिर गये। कुछ लोग पलायन कर गये तो कुछ लोगों ने मकान की छतों पर डेरा जमा लिया, बाढ का पानी उतरने के बाद भी इन लोगों की समस्याएं कम होने वाली नहीं है। इनके सामने सबसे बडी मुसीबत यह है कि करीब करीब हर साल इन्हें इस तरह की समस्या से जूझना पडता है। यह हाल तब है जब यमुना में बाढ ही नहीं आई। यमुना खतरे के निशान से नीचे बह रही थी और दर्जन भर कॉलोनियां जलमग्न हो गई थीं। 
  जिला प्रशासन की ओर से इन कॉलोनियों को लेकर ज्याद प्रयास नहीं किये गये, अधिकारियों ने इन कॉलोनियों जाकर लोगों को सांत्वना भी नहीं दी और आगे इन्हें इस तरह की परेशानी से कैसे बचाया जाएगा इस पर भी कोई बात नहीं हुई, इन कॉलोनियों को नजरअंदाज करना ही बेहत समझा गया जिसकी वजह यह भ्रष्टाचार और लापरवाही से पैदा हुई जनसमस्या है जिसके जिम्मेदार इन कॉलोनियों के निवासी, अधिकारी और जनप्रतिनिधि सब है, समाधान होने की बजाय यह समस्या साल दर साल बढती जा रही है, अभी भी कुछ लोगों ने तो घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर डेरा डाला हुआ है जबकि अधिकतर लोग घरों की छत पर रहकर ही गुजारा कर रहे हैं, जरूरत की खरीदारी करने के लिए वे नाव में बैठकर आवागमन कर रहे हैं, पूरे डूब क्षेत्र में नाव संचालन हो रहा है।

 

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