
शेषावतार बलभद्र जन्मोत्सव की खुशी में मगन रहा समूचा ब्रज
शेषावतार बलभद्र जन्मोत्सव की खुशी में मगन रहा समूचा ब्रज
-श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा दाऊजी मन्दिर का प्रांगण, जयकारों से रहा गुंजायमान
मथुरा । ब्रज के राजा भगवान बलभद्र का 5253 वां जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्ल पक्ष की छटी तिथि को समूचे ब्रज में धूमधाम से मनाया गया, भगवान बलदेव शेष अवतार हैं, ब्रज में जगह जगह वायगीरों के मेला लगे, मुख्य कार्यक्रम बलदेव स्थित शेषावतार के दाऊजी मंदिर में आयोजित हुआ, ब्रज के राजा, हलधर के जन्मोत्सव की खुशी में समूचा ब्रज मगन रहा, तड़के 4 बजे शहनाई वादन और विशेष श्रृंगार दर्शन के साथ जन्मोत्सव की शुरुआत हुई, मंदिर को भव्य तरीके से सजाया संवारा गया था।
दाऊजी मंदिर की शोभा देखते ही बन रही थी, मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और दाऊजी महाराज के जयकारों से वातावरण गूंजयमान रहा, जन्मोत्सव पर ठाकुर का श्रृंगार दिव्य अभिषेक हीरा जवाहरात और रत्नजड़ित आभूषणों से किया गया, जन्मोत्सव के लिए विशेष वस्त्र तैयार किए गए थे, सुबह 7 बजे हलधर सहस्त्रनाम पाठ और 8 बजे वेदपाठी पंडितों द्वारा बलभद्र हवन यज्ञ सम्पन्न होगा। इसके बाद 9 बजे विशेष अभिषेक व श्रृंगार दर्शन दिये, मुख्य आकर्षण प्राचीन परंपरा के अनुसार दोपहर 12 बजे दधिकाधौं महोत्सव था।
भगवान बलभद्र मल्ल विद्या के गुरू माने जाते हैं, यह दधिकांधा में देखने को भी मिला, दही, माखन, हल्दी, फल और नारियल का प्रसाद मंदिर से लुटाया गया तो मानो ग्वालों ने अपनी पूरी ताकत इस प्रसाद को पाने के लिए लगा दी, पीताम्बर वस्त्रों में सुसज्जित ग्वाल-बाल नारियल लूटने को टूट पडे और मंदिर प्रांगण दंगल में तब्दी जो गया, गुत्मगुत्था के बीच नारियल पाने वाले ग्वाले ऐसे प्रश्न्नचित नजर आ रहे थे मानो उनकी मनोकामना पूर्ण हो गई हो, जन्मोत्सव की मुख्य आकर्षण भव्य शोभायात्रा रही, जो शाम 5 बजे मंदिर प्रांगण से प्रारम्भ हुई, शोभायात्रा में सजीव झांकियां, बैंड बाजे और भक्ति गीतों के साथ श्रद्धालु झूमते गाते निकले, समूची नगरी मगन होकर झूम उठी, परंपरागत तरीके से सेवायत परिवार की महिलाएं इस शोभा यात्रा में पूरे श्रृंगार और आभूषण पहनकर शामिल होती हैं।