फास्ट फूड को और भी विषैला बना रहा है "सस्ता सॉस"
फास्ट फूड को और भी विषैला बना रहा है "सस्ता सॉस"
-टमाटर चाहें जिस रेट बिके लेकिन बेअसर सॉस की कीमत, ढेल ढकेल से पहुंच रहा यह सॉस
मथुरा । आप को सॉस खाने का शौक है तो आपको इसे लेकर सोचना पडेगा, ढेल ढकेल से लेकर होटल रेस्टोरेंट तक और गांव देहात की दुकान से आपके बच्चे के टिफिन तक पहुंच रहा सॉस आपकी और आपके बच्चों की सेहत के लिए धीमा जहर हो सकता है, एक ओर भगवान की नगरी वृंदावन में श्रद्धालु भक्ति में डूबे हैं, वहीं दूसरी ओर मिलावटखोर जनता के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ कर रहे हैं। बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे नकली सॉस लोगों की थाली को विषेला बना रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जहां टमाटर 40 से 50 रुपये किलो बिक रहा है, वहीं सॉस इससे कम कीमत में एक किलो मिल जा रहा है, जब टमाटर 100 रुपये किलो हो जाता है तब भी इस की कीमत में इजाफा नहीं होता, एक तरह से हम यह कह सकते हैं कि टमाटर की कीमतों में उतार चढाव से सॉस की कीमत अमूमन बेसर ही रहती हैं, टमाटर 10 रुपये किलो बिके या 100 रुपये किलो यह इस सॉस की कीमत स्थिर ही बनी रहती हैं, वहीं बाजार में टमाटर सॉस के नाम पर मात्र 10 रुपये में 80 ग्राम का पैकेट धड़ल्ले से बिक रहा है ।
सवाल यह उठता है कि आखिर इतने सस्ते दाम में सॉस कैसे बन रहा है ? क्या इसमें टमाटर की जगह कोई ‘रासायनिक खुराक’ मिलाई जा रही है ? स्थानीय व्यापारी सह वृंदावन व्यापार मंडल के अध्यक्ष धनेंद्र अग्रवाल ने इस गंभीर मुद्दे पर खाद विभाग पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा, वृंदावन और मथुरा में मिलावट का खेल खुलेआम चल रहा है और खाद्य विभाग आंख मूंदे बैठा है। जनता बीमार हो रही है, लेकिन विभाग के अफसर कार्रवाई की बजाय मौन साधे हुए हैं। उनका आरोप है कि नकली सॉस की सप्लाई मथुरा जिले के हर गांव, कस्बे और तहसील तक की जा रही है, जिससे ग्रामीण जनता तक भी यह रासायनिक जहर पहुंच चुका है।
जनता सवाल पूछ रही है कि जब लोगों की सेहत दांव पर है तो सरकार और खाद्य विभाग आखिर कर क्या रहे हैं ? क्या किसी बड़े खेल में ये दोनों शामिल हैं या फिर लापरवाही की हद पार हो चुकी है ? अब वक्त आ गया है कि प्रदेश सरकार और खाद्य विभाग नींद से जागें और इस सॉस के नाम पर फैल रही बीमारी की जाँच करें क्योंकि अगर यही हाल रहा तो वृंदावन की गलियों में भक्ति की जगह मिलावट का स्वाद हावी हो जाएगा और जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा, खाद्य निरीक्षक अधिकारी रीना शर्मा ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच की जाएगी, उन्होंने कहा कि जांच का पहला चरण यह पता लगाना होगा कि संबंधित लोगों को खाद्य सामग्री की सप्लाई आखिर कहां से की जा रही है।







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