छात्रवृत्ति घोटाला : पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी बर्खास्त
छात्रवृत्ति घोटाला : पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी बर्खास्त
-करुणेश त्रिपाठी पर मथुरा में तैनाती के दौरान अकूत सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप, 19.25 करोड की होगी वसूली
-जनपद मथुरा में तैनात रहे 24 अधिकारियों के खिलाफ चल रही है छात्रवृत्ति घोटाले की जांच
मथुरा । उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार एक्शन ले रही है, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत अब समाज कल्याण विभाग द्वारा भी बड़ी कार्रवाई की गई है, प्रदेश में समाज कल्याण विभाग में जिन सात अधिकारियों पर कार्यवाही हुई है उनमें एक मथुरा जनपद में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रहे करुणेश त्रिपाठी भी हैं ।
जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी की बर्खास्तगी के अलावा इनके खिलाफ बडी वसूली की कार्यवाही भी की गई है, विभाग के अंदर हड़कंप की स्थिति है, उन्हें बर्खास्त करने के साथ 19 करोड़ 25 लाख रुपये की वसूली का निर्देश दिया है, पूर्व में छात्रवृत्ति हड़पने के मामले में निलंबित हुंए तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी समेत 66 के खिलाफ फर्जीवाड़े का मुकदमा थाना सदर बाजार में मुकदमा दर्ज कराया गया था ।
जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर की तहरीर पर सहायक विकास अधिकारी, दो लिपिक और 62 आईटीआई के प्रबंधक और संचालक भी आरोपी बनाए गए थे, जिला समाज कल्याण अधिकारी की तहरीर पर दर्ज हुए मुकदमे में साल 2015-2016 से लेकर 2019-2020 की छात्रवृत्ति का गबन करने का आरोप लगाया गया, पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी, सहायक विकास अधिकारी राहुल कुमार, वरिष्ठ लिपिक नवीन मल्होत्रा, लिपिक योगेश कुमार के अलावा 62 आईटीआई के प्रबंधक और संचालक को आरोपी बनाया गया था।
उत्तर प्रदेश में जिन सात अधिकारियों पर कार्यवाही हुई है उनमें करुणेश त्रिपाठी (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मथुरा) भी हैं, उन पर तैनाती के दौरान निजी प्राइवेट आई0टी0आई0 संस्थानों को अनियमित तरीके से छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान कर गंभीर वित्तीय अनियमितता किया जाने का आरोप है, 11 मान्यता विहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ की धनराशि का भुगतान छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में किया जाना, निजी आई.टी.आई. संस्थानों द्वारा दो वर्ष आयु के बच्चों से लेकर 51 वर्ष तक की आयु वाले व्यक्तियों को आई.टी.आई. पाठ्यक्रम में प्रवेश दिला कर धनराशि का व्यपहरण करने का आरोप है ।
गौरतलब हो कि जिले में 2015-16 से 2019-20 तक हुए छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले की शिकायत बलदेव विधायक पूरन प्रकाश ने शासन में की थी, इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को सौंपी गई जिसके संगठन के उपनिरीक्षक मोहम्मद शाकिर ने कानपुर में मथुरा के कुल 130 शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था, विधायक पूरन प्रकाश को इस दौरान शिक्षण संस्थाओं की ओर से काफी विरोध का भी सामना करना पडा था, कलेक्ट्रेट पर विधायक के खिलाफ बुद्धि शुद्धि यज्ञ तक का आयोजन किया गया था ।
विधायक पूरन प्रकाश ने बताया कि इसमें तत्कालीन सात डीआइओस अरुण कुमार दुबे, भास्कर मिश्र, अशोक कुमार सिंह, मुकेश कुमार रायजादा, इंद्र प्रकाश सोलंकी, कृष्णपाल सिंह सोलंकी, डा. राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ सहायक राजेश कुमार शर्मा, सहायक बीएसए राघुवेंद्र सिंह, समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी, उमा शंकर शर्मा, विनोद शंकर तिवारी, पूरन चंद शर्मा, राहुल कुमार सहायक विकास अधिकारी, नवीन मल्होत्रा कनिष्ठ सहायक, योगेश कुमार कनिष्ठ सहायक, वरिष्ठ सहायक गिरिराज शर्मा, महावीर सिंह, सहायक कनिष्ठ मान सिंह शर्मा, प्रधान सहायक ओम शर्मा, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी श्याम सुंदर इकनौरिया, कुलदीप मिश्र, दिव्यांग जन सशक्तिकरण अधिकारी डा0 अजीत कुमार, संजीव कुमार कनिष्ठ सहायक सहित 24 अधिकारियों पर भी रिपोर्ट दर्ज हुई है ।







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