ड्रग्स से भी ज्यादा घातक है मोबाइल का नशा, खत्म हो रही आंखों की नमी
ड्रग्स से भी ज्यादा घातक है मोबाइल का नशा, खत्म हो रही आंखों की नमी
-स्वास्थ्य विभाग चलाएगा अभियान, जिला चिकित्सालय में काम कर रहा सेंटर
मथुरा । जिला अस्पताल में में खोले गए मानसिक बीमार लोगों के इलाज वाले कक्ष में अब बच्चों को मोबाइल के नशे से मुक्त कराया जा रहा है, पिछले कई साल से जिला चिकित्सालय में यह सुविधा दी जा रही है लेकिन प्रचार प्रसार के अभाव के चलते लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है ।
हर दूसरा आम आदमी अभी भी इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए बच्चों को डांटने फटकराने यहां तक कि पीटने तक ही सीमित हैं जबकि यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या है जिसका उपचार भी तरीके सही संभव है, बच्चे के साथ ज्यादा सख्ती करने पर वह चिडचिडा हो सकता है और विद्रोह भी कर सकता है, सीएमएस डा0 नीरज अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल का अधिक प्रयोग करते करते आज कल युवा, वयस्क सहित प्रत्येक आयु वर्ग में एक नवीन रोग ने जन्म लिया है।
मोबाइल का प्रयोग लोगों द्वारा इस हद तक किया जा रहा है कि उनकी आंखें भी शुष्क हो जा रही हैं। यदि बच्चों से मोबाइल ले लिया जाये या उन्हें मोबाइल प्रयोग करने से मना किया जाये तो वे आक्रामक हो रहे हैं, किसी से बात करनी हो या कोई सन्देश भेजना है तो यह काम झट से हो जाता है, ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक गेम जो कभी-कभी अवसाद में ले जाकर आत्महत्या के कगार पर छोड जाते है ।
महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल में बाकायदा एक सेंटर खोला गया है, जहां मोबाइल एडिक्ट बच्चों और बडों को मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है, अभिभावक बच्चों में बढ़ती इस लत से आजिज हैं लेकिन वह खुद भी इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं, मोबाइल का नशा शराब और ड्रग्स वाले नशे से भी बढ़कर है, इसकी वजह से बच्चों में नींद न आना, भूख की कमी, दिमाग पर बुरा असर और आंख खराब होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। किसी व्यक्ति में इस लत के आने से पहले तक मोबाइल के किरदार को देखें तो ये एक ऐसा माध्यम था जिसने जीवन को बिल्कुल ही सरल बना दिया था ।







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