शिलांग : ट्रैफ़िक का बढ़ता संकट~व्यवस्था सुधार की तात्कालिक आवश्यकता
शिलांग : ट्रैफ़िक का बढ़ता संकट~व्यवस्था सुधार की तात्कालिक आवश्यकता
मेघालय की राजधानी शिलांग अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ठंडी पहाड़ी हवाओं और साफ़-सुथरे वातावरण के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है लेकिन आज यह शहर एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसने इसकी पहचान को ही चुनौती दे दी है—बढ़ती ट्रैफ़िक अव्यवस्था, "संकरी पहाड़ी सड़कों, अनियोजित शहरीकरण और आधुनिक यातायात प्रणालियों" की कमी ने शिलांग को रोज़ाना जाम की पीड़ा से गुजरने पर मजबूर कर दिया है, यह स्थिति अब सिर्फ असुविधाजनक ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनने लगी है ।
@शिलांग की सड़कों पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?
1. भौगोलिक सीमाएँ और पुरानी सड़क संरचना:-
शिलांग का भूगोल स्वाभाविक रूप से संकरा और घुमावदार है, औपनिवेशिक काल में बनी सड़कें उस समय की जनसंख्या और परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप थीं लेकिन आज वही सड़कें दोहरे और तिहरे यातायात प्रवाह को संभाल पाने में पूरी तरह असमर्थ हैं, कई मुख्य मार्ग तो इतने पतले हैं कि दो कारें मुश्किल से एक साथ गुजर पाती हैं ।
2. निजी वाहनों की संख्या में विस्फोटक बढ़ोतरी :-
सीमित और गैर-विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के कारण लोग अपनी सुविधा के लिए निजी दोपहिया और कारों का उपयोग बढ़ा रहे हैं, शिलांग जैसे छोटे शहर में वाहनों की संख्या उसकी सड़क क्षमता से कहीं अधिक हो चुकी है, घर-घर वाहन होने से सड़कों पर स्थायी दबाव बना हुआ है ।
3. प्रमुख बाज़ार इलाकों में अव्यवस्था:-
पुलिस बाज़ार, लाइटमख़्राह और अन्य व्यस्त इलाकों में अवैध पार्किंग, फुटपाथों पर अतिक्रमण और कई स्थानों पर सड़क किनारे लगने वाले अस्थायी दुकानों की वजह से सड़क की उपयोगी चौड़ाई आधी रह जाती है, परिणामस्वरूप सामान्य दिन में भी यह क्षेत्र जाम की चपेट में रहता है ।
4. पर्यटन यातायात का बढ़ता बोझ:-
शिलांग एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र है, छुट्टियों और सप्ताहांत में शहर की आबादी के बराबर वाहनों का प्रवेश ट्रैफ़िक प्रणाली को अचानक चरम दबाव में डाल देता है, निजी पर्यटक वाहन और टैक्सियाँ स्थानीय यातायात को बुरी तरह प्रभावित करती हैं ।
5. आधुनिक ट्रैफ़िक प्रबंधन का अभाव:-
कई महत्वपूर्ण चौराहों पर ट्रैफ़िक सिग्नल का अभाव, सीमित पुलिस बल, पुरानी यातायात व्यवस्था और प्रभावी निगरानी तंत्र की कमी शहर में जाम की समस्या को स्थायी बना रही है, स्मार्ट ट्रैफ़िक सिस्टम की अनुपस्थिति शिलांग को आज भी पारंपरिक और अप्रभावी यातायात प्रबंधन पर निर्भर रखती है ।
#समस्या का बहुआयामी प्रभाव
1. दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त;-
जो यात्रा पहले 10–15 मिनट में पूरी हो जाती थी, वह अब 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक लेने लगी है। दफ्तर, स्कूल और अस्पताल जाने वाले नागरिक रोज़ाना मानसिक तनाव और देरी का सामना करते हैं ।
2. पर्यावरणीय प्रदूषण में वृद्धि
संकरी सड़कों पर रेंगती गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ और शोर शिलांग के स्वच्छ पर्यावरण पर चोट कर रहे हैं, पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद अब शहर प्रदूषण की समस्या से जूझने लगा है ।
3. आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर
व्यापारिक क्षेत्रों में जाम के कारण डिलीवरी सेवाओं में देरी, ईंधन की बर्बादी, पर्यटन उद्योग पर असर और कामकाज के घंटे प्रभावित होना आम बात हो चुकी है ।
4. सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाएँ
संकरी सड़कें, अचानक मोड़ और अवैध पार्किंग मिलकर दुर्घटनाओं की संभावनाओं को बढ़ा देते हैं जिससे आम जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ती है ।
★उपाय: शिलांग को राहत देने के लिए क्या जरूरी है?
1. मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण
Police Bazar जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मल्टी-स्टोरी पार्किंग केंद्र स्थापित करना सबसे पहला और आवश्यक कदम है, इससे सड़क किनारे पार्किंग हटेगी और यातायात सुचारु होगा ।
2. सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण
इलेक्ट्रिक मिनी बसें, शहर के भीतर शटल सेवा, साझा टैक्सी प्रणाली और पर्यटकों के लिए अलग से निर्धारित बस मार्ग विकसित किए जाएँ, जब विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा तो निजी वाहनों पर निर्भरता स्वतः घटेगी।
3. स्मार्ट यातायात प्रणाली का कार्यान्वयन
एआई आधारित ट्रैफ़िक सिग्नल, सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल पार्किंग प्रबंधन और “नो-पार्किंग” ज़ोन में सख्ती से कार्रवाई—ये सभी उपाय जाम को काफी हद तक कम कर सकते हैं ।
4. प्रमुख बाज़ारों को पैदल क्षेत्र घोषित करना
पुलिस बाजार और कुछ अन्य बाज़ार क्षेत्रों को विशेष घंटों में वाहन-मुक्त जोन बनाया जाए, इससे जाम भी कम होगा और बाज़ार का वातावरण भी सुधरेगा ।
5. पर्यटन यातायात का विनियमन
पर्यटक वाहनों को शहर में प्रवेश से पहले मुख्य प्रवेश बिंदुओं पर बनाए गए पार्किंग हब में रोका जाए और शहर के भीतर उन्हें शटल या ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध कराई जाए ।
6. जहाँ संभव हो वहाँ सड़क चौड़ीकरण
पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सीमित रूप से सड़क चौड़ीकरण किया जा सकता है जिससे आपात मार्गों पर दबाव घट सके ।
@निष्कर्ष : निर्णायक नीतिगत बदलाव की ज़रूरत
ट्रैफ़िक अव्यवस्था शिलांग के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है, प्रशासन, नागरिकों व स्थानीय संस्थाओं को मिलकर यह स्वीकार करना होगा कि समस्या गंभीर है और इसके समाधान के लिए एकीकृत, दीर्घकालिक और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है, शिलांग की सुंदरता, उसकी सांस्कृतिक पहचान और नागरिकों का जीवन—इन सबको बचाए रखने के लिए यातायात सुधार अब विलंबित नहीं किया जा सकता है, यदि शिलांग को वास्तव में “स्कॉटलैण्ड ऑफ द इस्ट ” की उपाधि का सम्मान बनाए रखना है तो वर्तमान ट्रैफ़िक संकट से उबरना शहर की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए ।
शिखर
अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ।







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