वृन्दावन : ठाकुर जी का प्राकट्योत्सव मनाने में जुटे लाखों श्रद्धालु
वृन्दावन : ठाकुर जी का प्राकट्योत्सव मनाने में जुटे लाखों श्रद्धालु
-बांके बिहारी के जयकारों से गूंजा निधिवन राज, निकाली स्वामी हरिदास, विट्ठल विपुल व जगन्नाथ जी की शोभायात्रा
मथुरा । जन जन के आराध्य बांके बिहारी के प्राकट्योत्सव पर मंगलवार की सुबह से ही धर्म नगरी वृंदावन में चारों ओर उल्लास छा गया, निधिवन राज मंदिर स्थित प्राकट्यस्थली पर सुबह से ही देश विदेश से आए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी, अपने आराध्य के दर्शन कर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था, सेवायतों द्वारा प्राकट्यस्थली का दूध, दही, घी, बुरा और जड़ी बूटियों से महाभिषेक किया गया, इसके बाद प्राकट्य स्थली में आरती उतारी गई, महाभिषेक के बाद भक्तों द्वारा गाई गई बधाई गायनों से प्राकट्य स्थली गुंजायमान हो उठी ।
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बांके बिहारी जी के जन्मोत्सव की खुशी में जमकर भक्त बधाई गायनों पर झूम उठे, ठा. बांके बिहारी के प्राकट्योत्सव उत्सव की शुरुआत आज ठाकुर जी की प्राकट्य स्थली निधिवन राज मंदिर परिसर में सुबह 4 बजे हुई, जहां श्री बांके बिहारी जी का दिव्य महाभिषेक किया गया, ठाकुर जी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और बूरा) से स्नान कराया गया। इस अवसर पर मंदिर में हरिनाम संकीर्तन साधु संतों ने प्रस्तुत किया। प्राकट्योत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण शाम को बांके बिहारी के प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास जी महाराज की निकाली गई भव्य शोभायात्रा रही ।
स्वामीजी अपने श्लड़ैतेश् ठाकुर जी को जन्मोत्सव की बधाई देने के लिए चांदी के रथ पर विराजमान होकर निधिवन राज से बांके बिहारी मंदिर के पहुंचे, शोभायात्रा में शामिल भक्त ‘श्री बांके बिहारी लाल की जय’ के जयकारे लगा रहे थे, साथ ही उनके भजन और कीर्तन शोभायात्रा को और भी खास बना रही थे। इस शोभायात्रा में विट्ठल विपुल जी (जगन्नाथ जी के भतीजे), जगन्नाथ जी (हरिदास जी के भाई) और स्वामी हरिदास जी के तीन सजे हुए रथ शामिल हुए। यह शोभायात्रा निधिवन से शुरू होकर रंगजी मंदिर, अनाज मंडी और दाऊजी तिराहे जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए मंदिर पहुंची ।
शोभायात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्ति और उल्लास में डूबकर नृत्य, कीर्तन और बधाई गीत गाते हुए चल रहे थे। पूरा मार्ग ढोल नगाड़ों और जयकारों से गूंज उठा। बांके बिहारी मंदिर और निधिवन राज मंदिर को देश विदेश से मंगाए गए सुगंधित फूलों, दीपों और झालरों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, पूरा मंदिर प्रांगण पीले रंग की आभा से दमक रहा है, बांके बिहारी जी के दर्शन करने और उत्सव में शामिल होने के लिए देश विदेश से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे थे जिससे धर्म नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, इस उत्सव से स्वामी हरिदास और बांके बिहारी जी के अनुपम प्रेम संबंध को जीवंत हो उठा। राजभोग प्रसादी भी स्वामी हरिदास जी के आगमन के बाद ही ठाकुर जी को अर्पित की गई।







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