भाषा संशोधन कार्यशाला सम्पन्न, वरिष्ठ साहित्यकारों ने की सहभागिता

भाषा संशोधन कार्यशाला सम्पन्न, वरिष्ठ साहित्यकारों ने की सहभागिता
   मथुरा । तुलसी साहित्य संस्कृति अकादमी (न्यास) के तत्वावधान में भाषा संशोधन कार्यशाला का आयोजन माधव संवाद केंद्र, गायत्री तपोभूमि में किया गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष गुप्त, मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित साहित्यकार मदनमोहन अरविंद, विशिष्ट अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता एवं कवि डॉ0 धनंजय कुमार तिवारी एवं उदयवीर सिंह न्यास के अध्यक्ष आचार्य नीरज शास्त्री, विद्याभारती प्रकाशन विभाग के निदेशक डॉ0 रामसेवक ने मां शारदे एवं भारत माता की चित्र छवि पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया ।


    कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने हिंदी में प्रयुक्त हो रहे अरबी फारसी के शब्दों की सूची बनाते हुए उनके हिंदी में अर्थ प्रस्तुत किए, इस अवसर पर राष्ट्रवादी साहित्यकार आचार्य नीरज शास्त्री ने कहा कि हिंदी के गौरव की रक्षा के लिए हिंदी को खिचड़ी भाषा बनने से रोकना होगा तथा इसे पुनः छायावादी युग के समान परिष्कृत रूप देना होगा, विद्या भारती प्रकाशन विभाग के निदेशक डॉ0 रामसेवक ने कहा कि हम अरबी फारसी के शब्दों के हिंदी अर्थ अपने पाठ्यक्रम की पुस्तकों में समाहित कर हिंदी के परिमार्जन पर बल देंगे और विशुद्ध हिंदी के प्रचलन का प्रयास करेंगे, उदयवीर सिंह ने कहा कि हिंदी भाषा में संशोधन के प्रयास निरंतर होने ही चाहिए । 
    डॉ0 धनंजय कुमार तिवारी ने बताया कि हिंदी भाषा में संशोधन आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और जयशंकर प्रसाद की परंपरा है जो आवश्यक है, वरिष्ठ साहित्यकार मदनमोहन शर्मा ’अरविंद ने अपने वक्तव्य में कहा कि अब साहित्यिक समाज को हिंदी के परिष्कार का बीड़ा उठाना ही होगा क्योंकि वर्तमान पीढ़ी व भावी पीढ़ी हिंदी के परिष्कृत रूप से बहुत दूर जा रही हैं, वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष गुप्त ने कहा कि हिंदी का परिष्कार हिंदी से जुड़े समाज का कर्तव्य है, अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए। इसके उपरांत सरस काव्य गोष्ठी का भी आयोजन हुआ, वंशिका शर्मा, कुमार देव, सत्यव्रत शुक्ला, आर्यन अग्रवाल, निकिता सिंह, कवि कुमार प्रखर, मनुज चतुर्वेदी भारत, पूनम शास्त्री, प्रेम कुमार, शरद गुप्ता आदि ने भी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं, संचालन शृंगार कवि अनुज अनुभव ने किया ।

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