चांदी उद्योग : लाखों कारीगरों पर आया संकट, फेम ने लिखा पत्र

चांदी उद्योग : लाखों कारीगरों पर आया संकट, फेम ने लिखा पत्र
-फेम के प्रदेश उपाध्यक्ष ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री को लिखा पत्र, जताई चिंता
   मथुरा । फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (फेम) द्वारा भारत सरकार के वाणिज्य मंत्री को लिखे एक पत्र में चांदी उद्योग में लगे लाखों कारीगरों की रोजी पर संकट आने की बात कही गई है, इस पत्र में मांग की गई है कि एमसीएक्स में नियम कड़े किये जाएं, चीन, अमेरिका, यूरोप की तरह भारत का कमोडिटी एक्सचेंज वायदा कारोबार चले, वहीं पत्र के माध्यम से व्यापारी कल्याण बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी समस्या से अवगत कराया गया है ।


   फेम के राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी एवं प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय कुमार अग्रवाल ने पत्र में मांग की है कि पारंपरिक चांदी हस्तशिल्प और आभूषण उद्योग के समक्ष उत्पन्न गंभीर संकट की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, वर्तमान में चांदी की कीमतों में आई अप्रत्याशित और असामान्य तेजी ने इस कुटीर उद्योग की निरंतरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, आयात शुल्क में कटौती की आवश्यकता है, चांदी के कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि चांदी पर प्रभावी वर्तमान आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से घटाकर तत्काल 2 प्रतिशत किया जाए, पत्र में कहा है कि शुल्क में यह कमी न केवल घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर करेगी, बल्कि हमारे छोटे कारीगरों और सूक्ष्म उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने हेतु आवश्यक संबल प्रदान करेगी, वहीं वायदा बाजार (एमसीएक्स) और फिजिकल डिलीवरी की अनिवार्यता है, वर्तमान में एमसीएक्स पर होने वाले अधिकांश सौदे केवल कागजी होते हैं ।


   उन्होंने मांग की है कि सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए एमसीएक्स के कुल व्यापार (वॉल्यूम) का कम से कम 25 प्रतिषत हिस्सा फिजिकल डिलीवरी (भौतिक सुपुर्दगी) के रूप में लेना अनिवार्य किया जाए, जब सट्टेबाजों पर वास्तविक माल की डिलीवरी की बाध्यता होगी, तभी कृत्रिम तेजी पर रोक लगेगी, एल्गो ट्रेडिंग और तकनीकी विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए, कंप्यूटर प्रोग्राम आधारित एल्गो ट्रेडिंग के कारण मिनटों के भीतर विशाल मात्रा में सौदे किए जाते हैं जिससे कीमतों में कृत्रिम उछाल आता है, इसका सीधा दुष्प्रभाव मथुरा, आगरा और कोल्हापुर जैसे केंद्रों के उन छोटे कारीगरों पर पड़ता है जिनके पास संसाधन सीमित हैं ।
  वहीं विकसित देशों के कमोडिटी बाजारों की तर्ज पर भारत में भी सेबी के माध्यम से ऐसी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वायदा बाजार केवल वास्तविक व्यापारिक सुरक्षा के लिए हो, ना कि शुद्ध सट्टेबाजी के लिए, आयात शुल्क में सुधार चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर लाया जाए, एमसीएक्स पर होने वाले व्यापार में न्यूनतम 25 प्रतिशत फिजिकल डिलीवरी का कड़ा नियम तत्काल लागू किया जाए, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने हेतु एमसीएक्स पर चांदी के सौदों के लिए मार्जिन मनी में वृद्धि की जाए, एल्गो ट्रेडिंग पर पाबंदी कमोडिटी बाजार में उच्च गति वाले तकनीकी व्यापार पर उचित सीमाएं तय की जाएं ।

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