पर्यावरण को शुद्ध रखने की हम सबकी जिम्मेदारी-भागवताचार्य
पर्यावरण को शुद्ध रखने की हम सबकी जिम्मेदारी-भागवताचार्य
मथुरा । ब्रज क्षेत्र के सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित राजेश अग्निहोत्री ने ग्वालियर के साकेत विहार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहा कि हम सबको पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखने के लिए प्रयास करना होगा, बिना भोजन के हम कुछ महीने जीवित रह सकते हैं, बिना जल के हम कुछ दिन जीवित रह सकते हैं परन्तु बिना ऑक्सीजन के हम एक घण्टा भी जीवित नहीं रह सकते हैं, ऑक्सीजन का हमारे जीवन में कितना अधिक महत्व है यह हम सभी ने कोरोना काल में देखा है और अनुभव भी किया है ।
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उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन हमें पेड़ पौधों से मिलती है, पेड़ पौधों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है, यदि पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखना है तो हमें अधिक से अधिक पेड़ पौधों को लगाना होगा, आप सभी को संकल्प लेना होगा कि आप अपने बच्चों के जन्मदिन पर केक काटने की अपेक्षा अपने बच्चे के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए एक पौधा लगाओ और पौधा पीपल, नीम, बरगद, पाकड़ या आम का होना चाहिए जिससे कि अधिक से अधिक ऑक्सीजन मिले ।
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भागवताचार्य राजेश अग्निहोत्री ने बताया कि पेड़ पौधे अपने भोजन बनाने की क्रिया में वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं और बदले में हमें ऑक्सीजन देते, वर्षा कराने के लिए भी पेड़ पौधे सहायक होते हैं, हमारा पूरा जीवन पेड़ पौधों पर आश्रित है, जन्म से लेकर मृत्यु तक पेड़ों से प्राप्त होने वाली लकड़ी का हमारे जीवन में आवश्यकता रहती है, इस दौरान भागवताचार्य ने "जीते लकड़ी मरते लकड़ी, अजब तमाशा लकड़ी का" भजन गाकर आम जनजीवन में पेड़ पौधों के महत्व को समझाते हुए श्रोताओं का ध्यान आकर्षित मंत्रमुग्ध कर दिया।
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