संस्कृत भारती ने मनाई आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती
संस्कृत भारती ने मनाई आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती
मथुरा । संस्कृत भारती ब्रजप्रांत द्वारा रामायण के रचयिता संस्कृत भाषा के आदि कवि महर्षि बाल्मीकि की जयंती पर विचार गोष्ठी एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम सरस्वती शिशु मंदिर दीनदयाल नगर में आयोजित किया गया, कार्यक्रम में संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मंत्री डॉ0 धर्मेन्द्र कुमार अग्रवाल एवं न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा ने महर्षि बाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुराणों के अनुसार उनका जन्म त्रेतायुग में महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र वरुण (प्रचेता) व माता चर्षणी की सन्तान के रुप में हुआ बचपन में रत्नाकर के नाम से जाने जाते थे ।.jpg)
उन्होंने बताया कि नारद जी की प्रेरणा से अधर्म का मार्ग त्याग कर धर्म मार्ग पर भगवत भक्ति में लीन हो गए और कठोर तपस्या की और ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से उन्होंने संस्कृत भाषा के महाकाव्य रामायण की रचना की जो की भारतीय संस्कृति और सनातन का प्रेरणादाई महान ग्रंथ के रुप में माना जाता है, गोष्ठी में संस्कृत भारती मथुरा जनपद अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने महर्षि बाल्मीकि को त्रिकालदर्शी व मां सरस्वती के वरद पुत्र बताया उन्होंने कहा वे शस्त्र व शास्त्र के महान ज्ञाता थे उन्होंने वनवास के समय माता सीता को अपने आश्रम में आश्रय दिया और राम के पुत्र लव, कुश को शस्त्र व शास्त्र दोनों विद्याओं में पारंगत किया आदि कवि महर्षि बाल्मीकि ने रामायण की रचना कर घर घर संस्कृत भाषा को पहुंचाया और राम के आदर्शों से सर्वसमाज को प्रेरित किया।(49).jpg)
गोष्ठी में हरस्वरुप यादव, संदीप चौधरी, शरद चतुर्वेदी साहित्याचर्य ने पौराणिक घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्याघ्र द्वारा क्रोंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार दिए जाने पर विलाप करते पक्षी के शोक में बाल्मीकि के मुख से प्रथम श्लोक निकला जिसे संस्कृत साहित्य का प्रथम श्लोक माना जाता है, गोष्ठी का शुभारंभ आचार्य मुरलीधर चतुर्वेदी द्वारा वैदिक व पौराणिक मंगलाचरण से किया गया, संस्कृत भारती के पदाधिकारियों ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रचार प्रमुख रामदास चतुर्वेदी शास्त्री ने बताया कि बाल्मीकि रामायण में सात अध्यायों में कुल 24,000 श्लोक मिलते हैं इसीलिए इस ग्रंथ को चतुर्विंशति साहस्त्री संहिता भी कहा जाता है ।















